HP School Education: हिमाचल शिक्षा विभाग में बड़ा संकट, सीबीएसई स्कूलों में नियुक्तियों से क्या बंद हो जाएंगे सामान्य स्कूल?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में नए शिक्षकों की तैनाती की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सामान्य स्कूलों से अनुभवी शिक्षकों को हटाया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा शिक्षा तंत्र पूरी तरह चरमरा जाएगा।

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मुकेश अग्निहोत्री की मंत्रिमंडलीय उप-समिति करेगी अंतिम फैसला

सचिवालय में शिक्षा सचिव राकेश कंवर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। इसमें शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और जीवन सिंह नेगी सहित कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों की यह टीम एक-दो दिन में मुकेश अग्निहोत्री की अगुवाई वाली मंत्रिमंडलीय उप-समिति के समक्ष अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी।

शिक्षा विभाग इस समय एक बड़ा डेटा बेस तैयार कर रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि इस बड़े फेरबदल से कुल कितने शिक्षक प्रभावित होंगे। अधिकारियों को डर है कि यदि सरकार ने मेरिट सूची को दरकिनार किया, तो पीड़ित शिक्षक सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

हजारों शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पर लगा ब्रेक

सरकार की योजना के मुताबिक प्रदेश के 150 उत्कृष्ट सीबीएसई स्कूलों में करीब 5623 शिक्षकों को नियुक्त किया जाना था। इसके लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के माध्यम से एक विशेष स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया गया था। इस लिखित परीक्षा में राज्यभर के कुल 9821 शिक्षक शामिल हुए थे।

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इस परीक्षा के बाद विभाग ने 6084 शिक्षकों की एक फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की थी। शिक्षा निदेशालय ने पिछले महीने इन चयनित शिक्षकों की काउंसलिंग के लिए विस्तृत शेड्यूल भी जारी कर दिया था। हालांकि, पंचायतीराज चुनाव की घोषणा के कारण विभाग को यह काउंसलिंग प्रक्रिया अचानक बीच में ही रोकनी पड़ी।

सामान्य स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई पर गहराया संकट

इसके अलावा विभाग ने 147 नवनियुक्त प्रिंसिपलों की काउंसलिंग पूरी करके उन्हें मेरिट के आधार पर स्कूल भी अलॉट कर दिए थे। इसके बावजूद उनकी अंतिम नियुक्ति प्रक्रिया अब तक अधूरी पड़ी है। मंत्रिमंडलीय बैठक में भी मंत्रियों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

सरकार का मानना है कि यदि सामान्य स्कूलों के बेस्ट शिक्षकों को सीबीएसई स्कूलों में भेज दिया गया, तो आम स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार अब इस गंभीर विवाद को सुलझाने के लिए कोई बीच का रास्ता तलाश रही है।

Reported By: Sunita Gupta

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