Paris News: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि फ्रांसीसी विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल अब मध्य पूर्व से अपने घरेलू बंदरगाह टूलॉन लौट रहा है। इस कदम से क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए एमओयू के बाद बदला फैसला
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, इस खतरनाक विमानवाहक पोत को फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में होर्मुज स्ट्रेट में प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मिशन के लिए भेजा गया था। मैक्रों ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से काफी स्थिरता आई है।
राष्ट्रपति मैक्रों के मुताबिक इसी ऐतिहासिक एमओयू की वजह से फ्रांस ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस के बारूदी सुरंग हटाने वाले संसाधन और सुरक्षा बेड़े फिलहाल वहीं तैनात रहकर सहयोगियों की मदद करेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा देने के लिए भेजा गया था विमानवाहक पोत
फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति कार्यालय ने कन्फर्म किया है कि चार्ल्स डी गॉल फिलहाल भूमध्य सागर में मौजूद है। फ्रांस और ब्रिटेन ने अप्रैल के मध्य में घोषणा की थी कि वे होर्मुज स्ट्रेट में एक बड़े बहुराष्ट्रीय सुरक्षा एस्कॉर्ट मिशन का नेतृत्व संभालेंगे।
इस अभियान की तैयारी के लिए मई में फ्रांस ने चार्ल्स डी गॉल को मध्य पूर्व के मिशन पर रवाना किया था। अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून को एमओयू पर अंतिम सहमति बनी थी। इसके अगले दिन ही मैक्रों ने पोत की वापसी के संकेत दे दिए थे।
ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का मुख्य मकसद
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान परमाणु कार्यक्रम की बातचीत में लगभग उन सभी बातों पर सहमत हो गया है, जिनकी अमेरिका को जरूरत थी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं मिलेगी।
सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। जब उनसे तेहरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी एक्शन से ईरान काफी कमजोर हुआ है।

