Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश ने काफी ज्यादा तबाही मचाई है। किन्नौर जिले में लैंडस्लाइड और बाढ़ के कारण शिमला-रिकांगपिओ नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है। पूरे राज्य में भारी बारिश और खराब मौसम के चलते अब तक चौदह लोगों की जान जा चुकी है। राज्य को सोलह करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
किन्नौर जिले के चोलिंग में शुक्रवार सुबह करीब चार बजे भारी बारिश से भयंकर बाढ़ आ गई। इस वजह से नेशनल हाईवे पर करीब तीस मीटर तक मलबा जमा हो गया। इस दौरान दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं। गनीमत रही कि दोनों कारें वहीं रुक गईं, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।
बारिश और लैंडस्लाइड से सड़कों और बिजली व्यवस्था को नुकसान
इसके अलावा रिब्बा इलाके में भी बाढ़ आ गई। मलबा आने की वजह से रिब्बा-कंडे लिंक रोड भी गाड़ियों की मूवमेंट के लिए पूरी तरह बंद हो गया है। मानसून शुरू होने से लेकर अब तक हिमाचल में करीब सोलह करोड़ रुपये का डैमेज हो चुका है। भूस्खलन के कारण उनचास सड़कें और तीन ट्रांसफार्मर बंद हैं।
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को भी मानसून का कहर जारी रहा। मरने वालों का आंकड़ा चौदह तक पहुंच गया है। तीस जून से मौसम से जुड़ी घटनाओं में बारह मौतें हुई हैं। खराब मौसम के कारण हुए रोड एक्सीडेंट में दो अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
हिमाचल प्रदेश में सामान्य से कई गुना अधिक हुई बारिश
लाहुल स्पीति को छोड़कर प्रदेश के अन्य सभी जिलों में नॉर्मल से काफी ज्यादा बारिश हुई है। पिछले तीन दिनों में राज्य में औसतन तीस मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। किन्नौर में तीन दिनों में अठारह मिलीमीटर बारिश हुई। यह नॉर्मल से चार सौ तेईस प्रतिशत से भी ज्यादा है। रेस्क्यू टीमें लगातार काम कर रही हैं।
पिछले चौबीस घंटों में शिमला के जुब्बड़हट्टी, मंडी और बिलासपुर में काफी बारिश दर्ज की गई। वहीं दिन के तापमान में भी छह डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। कुल्लू के भुंतर, मनाली और मंडी में अधिकतम तापमान काफी ज्यादा बढ़ा है। न्यूनतम तापमान में भी एक से दो डिग्री का अंतर देखने को मिला है।
मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आने वाले दिनों में मानसून के और एक्टिव होने की संभावना जताई है। बारह जुलाई तक राज्य में भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। बता दें कि जून महीने में इस बार बहुत कम बारिश हुई थी। यह साल उन्नीस सौ एक के बाद चौवालीसवीं सबसे कम बारिश थी।

