यूरोप में भीषण गर्मी के बीच ईरान की अनोखी पेशकश, प्रतिबंध हटाने पर एयर कंडीशनर निर्यात करने का दिया प्रस्ताव

Ankara News: यूरोप में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। ईरान ने यूरोपीय देशों से अपने ऊपर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाने की अपील की है। ईरान का दावा है कि बैन हटने पर वह यूरोप को बड़ी संख्या में कूलिंग उपकरण भेज सकता है।

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ईरानी प्रशासन के अनुसार, उनके पास पर्याप्त मात्रा में स्वदेशी तकनीक से बने एयर कंडीशनर उपलब्ध हैं। यदि यूरोप इन उपकरणों का आयात करता है, तो वहां गर्मी से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। तुर्किये में स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में एक विस्तृत पोस्ट साझा की है।

ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर यूरोपीय देशों को दी मित्रतापूर्ण सलाह

ईरानी दूतावास ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यूरोप में अभूतपूर्व हीटवेव चल रही है। वहां पर्याप्त कूलिंग सिस्टम न होने से लगातार आम लोगों की जान जा रही है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए यूरोपीय देशों को ईरान पर से प्रतिबंध हटा देने चाहिए। ईरान विभिन्न प्रकार के एयर कंडीशनर निर्यात करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दूतावास ने आगे कहा कि सालों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध झेलने के बावजूद ईरान ने हार नहीं मानी। उसने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक की मदद से अपने बेहतरीन एयर कंडीशनर विकसित किए हैं। उनके पास बेहतरीन तकनीकी विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमता है। अब यह यूरोप पर निर्भर करता है कि वह अपनी मदद चाहता है या नहीं।

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यूरोप के कई देशों में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, जनजीवन बेहाल

इस समय पूरे यूरोप में भीषण गर्मी ने हाहाकार मचा रखा है। मौसम की इस पहली तेज हीटवेव के कारण कई देशों में लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं। जर्मनी, चेक गणराज्य और पोलैंड में रविवार को पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस वजह से वहां की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

फ्रांस में भी कई दिनों तक औसत तापमान सामान्य से बहुत अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद आए तेज तूफानों के बीच अनुमान है कि अत्यधिक गर्मी के कारण करीब 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई दशकों में ऐसी जानलेवा स्थिति का सामना कभी नहीं किया था।

हीट डोम के कारण यूरोपीय देशों में लगातार बढ़ रहा है तापमान

वैज्ञानिकों के अनुसार, जून 1976 की हीटवेव मौजूदा स्थिति से लगभग 3.5 डिग्री सेल्सियस कम गर्म थी। वर्ष 2003 की भीषण गर्मी भी वर्तमान तापमान से काफी कम थी। इस बार अत्यधिक तापमान की मुख्य वजह एक स्थिर उच्च वायुदाब प्रणाली है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘हीट डोम’ कहा जाता है।

यह मौसम प्रणाली गर्म हवा को एक ही निश्चित क्षेत्र में कई दिनों या हफ्तों तक रोककर रखती है। इसके कारण ठंडी हवा अंदर नहीं आ पाती और तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना रहता है। इसी वजह से पूरे यूरोप में लगातार लू के थपेड़े चल रहे हैं और लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

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