विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने पुतला जलाने वाले आरोपितों को नहीं दी राहत

Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर पुतला जलाने और उसे सुरक्षा कक्ष की छत पर फेंकने के मामले में आरोपितों की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने इस कृत्य को विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि एक ‘विघटनकारी गतिविधि’ करार दिया है।

न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन यह हिंसा की कीमत पर नहीं हो सकता। आरोपितों ने न केवल सड़क पर पुतला जलाया, बल्कि सुरक्षा कर्मियों के विरोध के बावजूद जलते हुए पुतले को सुरक्षा कक्ष की छत पर फेंका। अदालत ने कहा कि यह कृत्य जानबूझकर किया गया था, जिससे गंभीर हादसा हो सकता था।

अदालत ने आरोपितों पर लगाया जुर्माना

हाई कोर्ट ने आरोपित जगदीप सिंह उर्फ जग्गा और उनके साथियों की याचिका को निरर्थक बताते हुए उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर ‘भारत के वीर ट्रस्ट’ में जमा कराई जाए। यह ट्रस्ट गृह मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, जो सुरक्षा बलों के कल्याण के लिए कार्य करता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज भी चलाई गई, जिसमें आरोपितों की पूरी हरकत साफ तौर पर कैद थी। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फुटेज आरोपितों की खतरनाक मंशा को साबित करते हैं। अदालत ने इन साक्ष्यों को आधार मानते हुए हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं के तहत चल रही कानूनी कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

लापरवाही नहीं, सुनियोजित अपराध

आरोपितों के वकीलों ने तर्क दिया था कि इस घटना में किसी को चोट नहीं पहुंची, इसलिए उन पर गंभीर धाराएं नहीं लगनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला महज लापरवाही का नहीं, बल्कि जानबूझकर किए गए अपराध का है। सुरक्षा कक्ष की ओर जलता हुआ पुतला फेंकना किसी भी सूरत में वैध विरोध प्रदर्शन नहीं माना जा सकता।

घटना 21 जून 2022 की है, जब आरोपित जेपी नड्डा के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास के बाहर एकत्र हुए थे। नारेबाजी के बाद उन्होंने पुतला जलाया और उसे सुरक्षा घेरे में फेंककर फरार हो गए थे। हाई कोर्ट का यह फैसला यह स्पष्ट संदेश देता है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली किसी भी गतिविधि को अदालतें हल्के में नहीं लेंगी।

Author: Gaurav Malhotra

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