सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या हिमाचल में पुरानी फैक्ट्रियों को अब नहीं मिलेगी सस्ती बिजली, जानें नीति का असली सच?

Himachal Pradesh News: उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि हिमाचल प्रदेश में विस्तार कर रही पुरानी औद्योगिक इकाइयां बिजली रियायतों की हकदार नहीं हैं। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की यह प्रोत्साहन नीति केवल पूरी तरह से नए स्थापित उद्योगों के लिए ही मान्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने बदला हाईकोर्ट का पुराना फैसला

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पुराने आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने औद्योगिक बिजली रियायतों से जुड़े इस बड़े विवाद में राज्य सरकार की दलीलों को सही मानते हुए उसके पक्ष में निर्णय सुनाया।

नीति के नियमों में केवल नए उद्योगों का जिक्र

सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 की औद्योगिक नीति का प्रावधान 16(ए) केवल ‘नई औद्योगिक इकाइयों’ पर लागू होता है। पीठ के अनुसार यह लाभ बड़े पैमाने पर अपना विस्तार कर रही पहले से मौजूद पुरानी औद्योगिक इकाइयों को नहीं दिया जा सकता है।

न्यायालय ने नीति की कानूनी संरचना को समझाया

पीठ ने कहा कि नीति की समग्र योजना और धारा 16 की संरचना से यह बात बिल्कुल साफ होती है। धारा 16(ए) के तहत मिलने वाला रियायती शुल्क लाभ सिर्फ नए उद्योगों के लिए था। वहीं, पहले से चल रहे और विस्तार करने वाले उद्योगों के लिए धारा 16(बी) अलग व्यवस्था करती है।

निजी फर्म को झटका और पुरानी रियायत खत्म

अदालत इस कानूनी सवाल पर विचार कर रही थी कि क्या अप्रैल 2022 के संशोधन नोटिस का इस रियायत पर कोई असर पड़ा। न्यायालय ने हाईकोर्ट के मई 2025 के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक निजी फर्म को बिजली शुल्क पर 15 फीसदी छूट देने को कहा गया था।

Author: Sunita Gupta

Hot this week

Related Articles

Popular Categories