Jaunpur News: इलाहाबाद हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जौनपुर के शाहगंज के उपजिलाधिकारी (SDM) ने अपने पूर्व के आदेश को वापस ले लिया है। मामला एक मृत व्यक्ति की शिकायत के आधार पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने से जुड़ा था। कोर्ट की चेतावनी के बाद एसडीएम ने अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर निर्माण कार्य न रोकने की बात स्वीकार की है।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष अंकित जायसवाल ने याचिका दायर की थी। याची ने भदी (शहरी) गांव में 0.046 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। एसडीएम ने 20 मार्च 2026 को एक आदेश पारित कर वहां चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी, जिसे याची ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
मृत शिकायतकर्ता का खुलासा
सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि जिस रामचंद्र यादव की शिकायत पर एसडीएम ने कार्रवाई की, उनकी मृत्यु तीन साल पहले ही हो चुकी थी। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना और पूछा कि बिना वास्तविकता जांचे एसडीएम ने किस हैसियत से आदेश दिया। कोर्ट ने एसडीएम को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह दो निजी पक्षों के बीच का भूमि विवाद था। यदि किसी को निर्माण से आपत्ति थी, तो उसे सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था, न कि एसडीएम के समक्ष शिकायत करनी चाहिए थी। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कि हलफनामा न देने पर एसडीएम को स्वयं हाजिर होना होगा, प्रशासन ने अपना रुख बदल लिया।
एसडीएम शाहगंज ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि अब वे याची को निर्माण करने से नहीं रोक रहे हैं। अदालत ने इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बिना जांच-पड़ताल के की गई कार्रवाई और अदालती हस्तक्षेप के बाद मिली राहत का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
Author: Ajay Mishra
