Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के दिग्गज साहित्यकार और प्रख्यात लेखक कृष्ण कुमार नूतन का मंडी में निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे। शनिवार शाम को उन्होंने अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। उनके जाने से साहित्य जगत में शोक है।
मंडी के रहने वाले कृष्ण कुमार नूतन ने साहित्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा मुकाम हासिल किया था। शनिवार शाम करीब सवा सात बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। केके नूतन के निधन की खबर मिलते ही देश और प्रदेश के तमाम कला प्रेमियों और साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।
बॉलीवुड फिल्म के लिए लड़ी थी ऐतिहासिक कानूनी जंग
कृष्ण कुमार नूतन को प्रसिद्ध हिंदी फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’ के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। मशहूर निर्देशक वी शांताराम की यह फिल्म नूतन जी के लिखे लोकप्रिय उपन्यास ‘यादगार’ पर आधारित थी। इस फिल्म की कहानी के अधिकारों को लेकर उन्होंने कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की थी।
केके नूतन मंडी जिला के पहले ऐसे लेखक थे, जिनकी कोई साहित्यिक कृति साल 1948 में ही छपकर बाजार में आ गई थी। उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में कुल 20 शानदार पुस्तकें समाज को दीं। नूतन जी की लेखनी में उपन्यासों की संख्या सबसे अधिक थी, जिन्हें पाठकों ने खूब पसंद किया।
डॉ. यशवंत सिंह परमार राज्य पुरस्कार से हुए थे सम्मानित
उनकी लिखी ऐतिहासिक किताब ‘इतिहास साक्षी है’ को हिंदी साहित्य में एक मील का पत्थर माना जाता है। इस बेहतरीन साहित्यिक रचना के लिए हिमाचल प्रदेश के भाषा एवं संस्कृति विभाग ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘डॉ. यशवंत सिंह परमार राज्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। उन्होंने देश का मान बढ़ाया था।
साहित्य साधना के साथ ही नूतन जी का सामाजिक और प्रशासनिक जीवन भी बेहद बेदाग और प्रेरणादायी रहा। वे सरकारी सेवा के दौरान आईटीआई (ITI) में अधीक्षक के पद पर तैनात थे। वे इसी पद से सेवानिवृत्त हुए थे और लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
कर्मचारी हितों के लिए भी केके नूतन हमेशा आगे खड़े रहते थे। वे हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के प्रमुख संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने साल 1970 के ऐतिहासिक राज्य कर्मचारी आंदोलन में मुख्य सूत्रधार बनकर बड़ा नेतृत्व किया था। उनके इस बड़े योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
Author: Sunita Gupta

