Lucknow News: उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। साल 2016 में आयोजित डार्क रूम सहायकों की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। मानव संपदा पोर्टल पर सत्यापन के दौरान खुलासा हुआ है कि एक ही नाम और विवरण का उपयोग कर कई लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर नियुक्ति पाकर सरकारी वेतन का लाभ उठाया है।
आंकड़ों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया में केवल 355 अभ्यर्थियों को चुना जाना था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर 366 लोगों ने ज्वाइनिंग दी। यह धांधली स्वास्थ्य महानिदेशालय और मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालयों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। अब विभाग इस घोटाले की परतों को खोलने के लिए गहन जांच कर रहा है, जिसके बाद दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है।
एक नाम, कई ठिकाने: फर्जीवाड़े का जाल
जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने सरकारी सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। उदाहरण के लिए, सुधीर कुमार नाम का एक व्यक्ति एक साथ छह अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत पाया गया। इसी तरह, दिलीप सिंह जैसे अभ्यर्थी दो जगहों पर नौकरी करते मिले, जहां उनकी व्यक्तिगत जानकारी समान थी, केवल उनका [ID Number Redacted] अलग था।
फर्जीवाड़े का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। हरदोई, अंबेडकरनगर, चित्रकूट, इटावा और लखनऊ समेत कई जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं। अवधेश कुमार, चौधरी सपना पटेल, साधना पटेल, गिरिराज सिंह, जगदीश प्रसाद, राहुल कुमार, राजेश कुमार और रीमा चौधरी जैसे कई नाम फर्जी नियुक्तियों में शामिल पाए गए, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया है।
इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 16 जून 2016 को तत्कालीन महानिदेशक और निदेशक पैरामेडिकल के हस्ताक्षरों से हुई थी, जिसके बाद 15 जुलाई को अतिरिक्त 65 लोगों की सूची जारी की गई। फिलहाल, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. पवन अरुण ने कहा है कि यह मामला काफी पुराना है और विभाग इस पूरे घटनाक्रम के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है।
Author: Ajay Mishra

