Himachal High Court: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में देरी पर भड़का हाई कोर्ट, NHAI के एमडी और मुख्य सचिव को किया तलब

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड का गहनता से अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।

हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अब हमारे पास एनएचएआइ (NHAI) के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। अदालत अब सीधे नेशनल हाईवे अथॉरिटी के सबसे बड़े अधिकारी से इस बात का लिखित वचन लेगी कि कंपनी आखिरकार किस निश्चित अवधि तक इस फोरलेन का काम पूरा कर पाएगी।

पांच वर्षों से बदहाल सड़क पर सफर कर रहे हैं यात्री

मनाली और कुल्लू की तरफ जाने वाले देश-विदेश के सभी पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को इस अधूरे निर्माण कार्य के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग पिछले पांच वर्षों से भी अधिक समय से इस मार्ग पर बदहाली और परेशानी झेलने को मजबूर हैं।

हाई कोर्ट ने पहले भी संबंधित ठेकेदार और एनएचएआइ से निर्माण कार्य पूरा करने की अंतिम समयसीमा की विस्तृत जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि फोरलेन निर्माण को समय पर पूरा न करने के लिए हर बार कोई न कोई नया बहाना बना दिया जाता है।

झूठे आश्वासन पर हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को घेरा

उधर, हिमाचल प्रदेश में न्यायपालिका के सुदृढ़ीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर चल रहे एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव को निजी तौर पर अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

खंडपीठ ने पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन करते हुए मुख्य सचिव को तत्काल नया हलफनामा दायर करने का हुक्म सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की तरफ से लगातार दिए जा रहे झूठे आश्वासनों पर कड़ा ऐतराज जताया और इस पर मुख्य सचिव से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा है।

राज्य सरकार द्वारा बार-बार वित्तीय संकट का रोना रोकर न्यायपालिका से जुड़ी जरूरी आधुनिक सुविधाओं और नई अदालतों के गठन के प्रस्तावों को लटकाया जा रहा था। हाई कोर्ट ने सरकार के इस ढुलमुल रवैए और आलाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर व तीखी टिप्पणियां की हैं।

अदालत ने कहा कि सरकार ने पिछली सुनवाई पर भरोसा दिया था कि यह मामला 31 मार्च 2026 को कैबिनेट के समक्ष सकारात्मक विचार के लिए भेजा गया है। इसके विपरीत 28 अप्रैल 2026 को जारी सरकारी पत्र हाई कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Author: Sunita Gupta

Hot this week

Related Articles

Popular Categories