CBSE 12th Result: 100 रुपये की जगह 3.5 लाख रुपये तक की मांग, पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर मची भारी अफरा-तफरी

Delhi News: सीबीएसई कक्षा 12वीं का रिजल्ट घोषित होने के बाद भी लाखों छात्रों की परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं। ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम से कॉपियों की जांच पर छात्र लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब अपनी आंसरशीट की स्कैन कॉपी हासिल करने में परीक्षार्थियों को भारी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पुनर्मूल्यांकन पोर्टल खुलने के बाद फीस में भारी गड़बड़ी की नई शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों के अनुसार, एक विषय की कॉपी के लिए 100 रुपये की फीस तय है। इसके बावजूद तकनीकी खराबी के कारण पोर्टल पर 10,000 रुपये से लेकर 3.5 लाख रुपये तक के भुगतान का विकल्प दिख रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए भारी-भरकम फीस के स्क्रीनशॉट

इंटरनेट पर बहुत से छात्रों ने शिकायत की है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) में सही जवाब होने के बावजूद उनके अंक काटे गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक स्क्रीनशॉट में एक छात्र से चार विषयों के लिए कथित तौर पर 69,420 रुपये मांगे जा रहे थे। इससे कुल रकम लाखों में पहुंच गई।

एक अन्य मामले में प्रत्येक पेपर के लिए 8,000 रुपये की फीस दिखाई गई। इससे दो विषयों की कुल रकम 16,000 रुपये हो गई। 12वीं के नतीजों के पुनर्मूल्यांकन के लिए शुरुआती तीन घंटों में ही करीब 1.26 लाख आवेदन आए थे। इस बार परीक्षा में कुल 17.68 लाख बच्चे शामिल हुए थे।

तकनीकी गड़बड़ी के बीच सीबीएसई ने 24 मई तक बढ़ाई तारीख

बढ़ते विवाद को देखते हुए सीबीएसई ने एक नया बयान जारी कर प्रक्रिया की टाइमलाइन बढ़ा दी है। बोर्ड ने कक्षा 12वीं की आंसरशीट की स्कैन फोटोकॉपी पाने की आखिरी तारीख 24 मई तक बढ़ा दी है। इसके बाद छात्रों को वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करने हेतु दो दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा।

सीबीएसई ने बताया कि वेबसाइट पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा है और बिना अनुमति के दखल की कोशिशें भी हुई हैं। एक अधिकारी ने कहा कि पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन किसी भी बच्चे को नुकसान नहीं होगा। कुछ यूजर्स ने सिस्टम हैक होने और सुरक्षा से समझौता होने का आरोप लगाया है।

धुंधली और फीकी आंसरशीट अपलोड होने से खड़े हुए सवाल

छात्रों और अभिभावकों ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि अपलोड किए गए कुछ पेज बेहद धुंधले और पढ़ने में मुश्किल हैं। कई लोगों ने कहा कि बुनियादी टेक्स्ट, नंबर और सिंबल भी साफ नहीं दिख रहे हैं। इससे मार्किंग की जांच करना असंभव हो गया है।

विद्यार्थियों ने बोर्ड के सामने तीन बड़े सवाल खड़े किए हैं। पहला यह कि सीबीएसई ने इतनी धुंधली कॉपियों की मार्किंग कैसे की? दूसरा, बहुविकल्पीय सवाल में सही जवाब पर अंक क्यों काटे गए? और तीसरा सवाल पोर्टल पर सही फीस न दिखने को लेकर उठाया गया है।

Author: Gaurav Malhotra

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