Delhi News: केंद्र की मोदी सरकार ने देश की सत्ता में अपने बेहद सफल 12 साल पूरे कर लिए हैं। पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक असाधारण और अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। ‘संकल्प से सिद्धि’ का मूल मंत्र हमेशा सरकार की नीतियों का मजबूत आधार रहा है।
इस ऐतिहासिक कार्यकाल के दौरान सरकार ने कई साहसिक फैसले लिए हैं। इन ऐतिहासिक निर्णयों ने भारत को एक उभरती शक्ति से बदलकर वैश्विक पटल पर एक मजबूत ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में स्थापित किया। ये ऐतिहासिक कदम केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि देश के बढ़ते आत्मविश्वास के प्रतीक हैं।
इन दूरदर्शी निर्णयों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख में चार चांद लगा दिए। राजनीतिक विश्लेषक मोदी सरकार के इन 12 वर्षों को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यकाल नहीं मानते हैं। वे इस समय को आधुनिक ‘राष्ट्र निर्माण के एक महान युग’ के रूप में देखते हैं।
अनुच्छेद 370 का खात्मा और जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक पुनर्गठन
सरकार ने अगस्त 2019 में दशकों से लंबित अनुच्छेद 370 और 35A को पूरी तरह समाप्त कर दिया। इस साहसिक कदम से देश में ‘एक राष्ट्र, एक विधान’ का सपना सच हुआ। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में बहुत बड़ा और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया। अब भारतीय संविधान के सभी प्रावधान और केंद्रीय कानून वहां भी पूरी तरह लागू हैं। इस बड़े बदलाव के बाद वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
घाटी में निजी निवेश तेजी से बढ़ने लगा है। पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। केंद्र सरकार के इस रणनीतिक कदम ने कश्मीर में अलगाववाद की कमर तोड़ दी है। अब वहां शांति और खुशहाली का एक नया दौर शुरू हो चुका है।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा सदियों से कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद इस विवाद का संवैधानिक तरीके से सर्वसम्मति से समाधान निकाला गया। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक नया पुनर्जागरण हुआ।
यह बड़ा फैसला वैश्विक स्तर पर आस्था और संवैधानिक मर्यादा के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण बना। राम मंदिर का निर्माण करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था को मिला एक महान सम्मान है। भव्य मंदिर बनने के बाद अयोध्या पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बन चुकी है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और मैन्युफैक्चरिंग हब बनता देश
सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के जरिए विदेशी आयात पर देश की निर्भरता को बहुत कम कर दिया है। आज भारत रक्षा उपकरणों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों तक का एक बड़ा ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बन रहा है। सरकार की नीतियों ने देश की घरेलू विनिर्माण क्षमता को नई उड़ान दी है।
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए आकर्षक इंसेंटिव स्कीम शुरू की। इस अभियान के तहत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। एकल खिड़की निकासी और श्रम कानूनों के सरलीकरण ने विदेशी कंपनियों के लिए भारत में रास्ते आसान किए।
देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने इन छोटे उद्योगों के लिए आसान लोन, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार प्रदान किए। इन विशेष आर्थिक पैकेजों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के करोड़ों नए अवसर पैदा किए हैं।
कोरोना संकट में स्वदेशी ‘वैक्सीन विजय’ का वैश्विक चमत्कार
भारत ने कोरोना महामारी के दौरान रिकॉर्ड समय में दो स्वदेशी वैक्सीन- कोवैक्सीन और कोविशील्ड का निर्माण किया। इसके बाद देश में दुनिया का सबसे बड़ा और पारदर्शी टीकाकरण अभियान चलाया गया। भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर की इस तकनीकी श्रेष्ठता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।
महामारी के शुरुआती दौर में जब शक्तिशाली देश वैक्सीन के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने मिशन मोड पर काम किया। भारत ने 140 करोड़ से अधिक की अपनी विशाल आबादी तक मुफ्त वैक्सीन पहुंचाई। साथ ही ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत दुनिया के गरीब देशों को भी दवाएं दीं।
संकट के समय अन्य देशों की मदद करके भारत ने वैश्विक मंच पर ‘संकटमोचक’ की एक नई पहचान बनाई। इस मानवीय कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के सम्मान को बहुत ऊंचा कर दिया। भारत की इस वैक्सीन कूटनीति की सराहना संयुक्त राष्ट्र सहित सभी वैश्विक संगठनों ने की।
डिजिटल इंडिया और यूपीआई से आई ऐतिहासिक वित्तीय क्रांति
सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ नीति के तहत लॉन्च हुए एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) ने देश की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया। आज भारत विश्व स्तर पर सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट इकोनॉमी बन चुका है। विकसित देश भी भारत के इस सफल यूपीआई मॉडल को अपना रहे हैं।
यूपीआई ने बैंकों के आईएफएससी कोड या अकाउंट डिटेल डालने की पुरानी जटिलता को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। अब आम नागरिक केवल क्यूआर कोड स्कैन करके या यूपीआई आईडी के जरिए कहीं भी पैसे भेज सकते हैं। इस तकनीक ने छोटे दुकानदारों को मुख्यधारा से जोड़ा है।
जीएसटी का ऐतिहासिक कार्यान्वयन और पारदर्शी टैक्स व्यवस्था
सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की व्यवस्था के तहत वस्तु एवं सेवा कर (GST) को देश में लागू किया। इस ऐतिहासिक आर्थिक सुधार ने राज्यों के बीच की सभी व्यापारिक बाधाओं को पूरी तरह खत्म कर दिया। इसने देश की टैक्स प्रणाली को बेहद पारदर्शी बनाया है।
जीएसटी लागू होने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के दर्जनों अलग-अलग अप्रत्यक्ष कर लागू थे। इनमें एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट और एंटरटेनमेंट टैक्स शामिल थे। जीएसटी ने इन सभी को हटाकर एक सरल एकल कर प्रणाली लागू की, जिससे देश का राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है।
आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास और विकसित भारत की नींव
सरकार ने देश में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों, आधुनिक एक्सप्रेसवे और विश्वस्तरीय एयरपोर्ट्स का एक मजबूत जाल बिछाया है। इस बुनियादी कायाकल्प के जरिए सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ की एक बेहद मजबूत और टिकाऊ भौतिक नींव तैयार कर दी है, जिसकी चारों तरफ सराहना हो रही है।
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की गति में पिछले सालों में अभूतपूर्व तेजी आई है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे आधुनिक मार्गों ने प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच की दूरी को काफी कम कर दिया है। स्वदेशी तकनीक से बनी अर्ध-उच्च गति वाली ‘वंदे भारत’ ट्रेनें रेलवे की नई पहचान हैं।
देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को अब एयरपोर्ट की तर्ज पर पुनर्विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के माध्यम से देश के छोटे शहरों को विमान सेवा से सीधे जोड़ा है। इससे आम नागरिकों का हवाई यात्रा करने का सपना साकार हुआ है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से भ्रष्टाचार और बिचौलियों का अंत
सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की ऐतिहासिक शुरुआत की। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के इस कदम से सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर प्रभावी लगाम लगी है। इस पारदर्शी व्यवस्था ने योजनाओं से बिचौलियों को पूरी तरह बाहर कर दिया।
डीबीटी का मुख्य उद्देश्य सरकारी सब्सिडी और राशन का लाभ सीधे लाभार्थी के [Aadhaar Redacted] लिंक बैंक खाते में पहुंचाना है। इस तकनीक ने करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े को रोका है। ‘सही लाभ, सही व्यक्ति तक, बिना किसी देरी के’ का मूल मंत्र इसके जरिए सफल हुआ है।
‘मिशन शक्ति’ का सफल परीक्षण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
भारत ने अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया के सामने अपनी वास्तविक ताकत का लोहा मनवाया है। 27 मार्च 2019 को ‘मिशन शक्ति’ के तहत भारत ने एक एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल का सफल परीक्षण किया। भारत ने अंतरिक्ष में एक सक्रिय उपग्रह को सटीक निशाना बनाकर नष्ट किया।
ऐसा विशिष्ट कारनामा करने वाला भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बना है। इस सफल परीक्षण ने साबित किया कि भारत अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को बहुत कम किया गया।
सरकार ने रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगाने के लिए एक कड़ी ‘नेगेटिव इम्पोर्ट लिस्ट’ जारी की है। अब भारतीय कंपनियों को ही हथियार बनाने का अनिवार्य मौका मिलता है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में अत्याधुनिक ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ विकसित करके तोपों और मिसाइलों का निर्माण हो रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन से जन-स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार
सरकार ने देश में दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान चलाकर जन-स्वास्थ्य के प्रति एक नई सोच को जन्म दिया। स्वच्छ भारत मिशन ने देश के नागरिकों की पुरानी आदतों और जीवनशैली में व्यापक सुधार किया है। इस अनोखे जन-आंदोलन की तारीफ वैश्विक स्तर पर बड़े नीति निर्माताओं ने की है।
यह मिशन केवल शौचालयों के निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने लोगों के व्यवहार को बदला है। गांवों और शहरों को खुले में शौच से मुक्त बनाकर महिलाओं को सम्मान का जीवन दिया गया। इस अभियान ने साफ-सफाई को हर भारतीय के दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है।
‘योग’ को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाकर soft power में भारी बढ़ोतरी
भारत ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत ‘योग’ को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई। भारत के कूटनीतिक प्रयासों के कारण ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित किया। इस प्रस्ताव को वैश्विक मंच पर बहुत बड़ा ऐतिहासिक समर्थन मिला था।
इस शांतिपूर्ण प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में रिकॉर्ड 177 देशों का अटूट समर्थन मिला। विश्व के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव के लिए यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। योग को मिली इस वैश्विक स्वीकृति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को अत्यधिक मजबूत किया है।
‘ग्लोबल साउथ’ की गूंज और G20 की ऐतिहासिक अध्यक्षता
भारत ने अपनी ऐतिहासिक G20 अध्यक्षता के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की मजबूत आवाज बनकर काम किया। भारत ने वैश्विक राजनीति के इस सबसे बड़े मंच पर खुद को एक निष्पक्ष, न्यायप्रिय और बेहद मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में पूरी दुनिया के सामने सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया।
यह सफल अध्यक्षता भारतीय कूटनीति के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है। इन 12 वर्षों के साहसिक कदमों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब किसी वैश्विक एजेंडे का इंतजार नहीं करता। आज का नया भारत खुद पूरी दुनिया के विकास के लिए नए एजेंडे सेट करता है।
Author: Harikarishan Sharma


