CJP Viral Trends: सोशल मीडिया पर क्यों आई कॉकरोच जनता पार्टी की बाढ़ और कैसे इसने हिलाया सियासी गलियारा?

Delhi News: भारत में सोशल मीडिया पर अचानक उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) इस समय भारी सुर्खियां बटोर रही है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ यह डिजिटल आंदोलन अब युवाओं के आक्रोश की बड़ी आवाज बन चुका है। महज कुछ ही दिनों में इस पैरोडी राजनीतिक दल ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।

दरअसल, यह पूरा मामला 15 मई को देश की शीर्ष अदालत से शुरू हुआ था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान व्यवस्था पर हमला करने वाले लोगों को परजीवी और कॉकरोच कह दिया था। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी तीखी आलोचना हुई, जिसने इस नए ऑनलाइन आंदोलन को जन्म दिया।

सीजेआई की विवादित टिप्पणी और सोशल मीडिया का तीखा गुस्सा

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने बढ़ती आलोचना को देखते हुए बाद में इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण भी जारी किया। उन्होंने कहा कि उनके मौखिक बयान को मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से पेश किया है। उनका इशारा केवल उन लोगों की तरफ था जो फर्जी डिग्री के सहारे कानूनी पेशे में घुस आए हैं।

लेकिन मुख्य न्यायाधीश की सफाई आने से पहले ही डिजिटल स्पेस में एक नया राजनीतिक व्यंग्य जन्म ले चुका था। बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के छात्र अभिजीत दीपके ने 16 मई को एक्स (ट्विटर) पर एक गूगल फॉर्म शेयर किया। उन्होंने इस फॉर्म के जरिए लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया।

अभिजीत के इस फॉर्म पर कुछ ही घंटों में 5,000 से अधिक लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसके बाद इंटरनेट का एक सामान्य मजाक युवाओं के सार्वजनिक असंतोष और राजनीतिक हताशा को दिखाने वाला मंच बन गया। युवा इस नाम के जरिए मुख्य न्यायाधीश के उस बयान का लोकतांत्रिक विरोध कर रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर बीजेपी से आगे निकली कॉकरोच जनता पार्टी

सोशल मीडिया पर इस अनोखी पार्टी की लोकप्रियता का अंदाजा इसके तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स से लगाया जा सकता है। सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या लगभग दो करोड़ तक पहुंच गई है। यह संख्या देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के कुल फॉलोअर्स से भी करीब दोगुनी हो चुकी है।

इस ऑनलाइन आंदोलन की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी साफ तौर पर सुनाई देने लगी है। ब्रिटिश समाचार वेबसाइट द गार्डियन और रॉयटर्स ने इस अनोखी पार्टी पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। विदेशी मीडिया ने इसे भारतीय युवाओं के भीतर छिपी आर्थिक और सामाजिक हताशा का प्रतीक बताया है।

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय युवा अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए कॉकरोच को एक प्रतीक की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कॉकरोच विपरीत परिस्थितियों में भी जिंदा रहने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि युवाओं ने इसे अपने कड़े संघर्ष और जुझारूपन का नया चेहरा बना लिया है।

मशहूर राजनीतिक हस्तियों और पूर्व नौकरशाहों का मिला समर्थन

अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल अल जज़ीरा ने भी अपनी रिपोर्ट में सीजेपी को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस डिजिटल अभियान से आम युवाओं के साथ-साथ कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी जुड़ रही हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी जैसे नाम शामिल हैं।

संस्थापक अभिजीत दीपके पहले आम आदमी पार्टी के लिए काम कर चुके हैं जो खुद एक बड़े आंदोलन से निकली थी। दीपके का कहना है कि यह आंदोलन अचानक हुआ है जो युवाओं के गहरे वित्तीय तनाव को दर्शाता है। देश का पढ़ा-लिखा युवा इस समय रोजगार के संकट से सबसे ज्यादा परेशान है।

वैश्विक वित्तीय सर्वे एजेंसी डीलॉइट की ताजा रिपोर्ट भी भारत के युवाओं में बढ़ती इसी आर्थिक बेचैनी की पुष्टि करती है। देश की कुल 1.42 अरब आबादी में लगभग 65 फीसदी हिस्सा 35 वर्ष से कम उम्र का है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक युवाओं में बेरोजगारी की दर काफी अधिक है।

संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से बदलाव चाहते हैं भारतीय युवा

संयुक्त अरब अमीरात की वेबसाइट खलीज टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का विश्लेषण किया है कि क्या यह दल चुनाव लड़ेगा। सीजेपी के संस्थापक ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक पैरोडी संगठन है। उनका मकसद चुनाव लड़ना या पड़ोसियों की तरह कोई असंवैधानिक आंदोलन खड़ा करना बिल्कुल नहीं है।

अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि भारत के जेन-ज़ी युवा पूरी तरह परिपक्व और राजनीतिक रूप से सचेत हैं। वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हिंसक रास्ते को नहीं चुनेंगे। युवा अपनी असहमति को केवल शांतिपूर्ण और पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीकों से ही दुनिया के सामने रखना चाहते हैं।

Author: Harikarishan Sharma

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