Delhi News: साकेत के सैदुलाजाब में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए मलबे में दफन कर दिया है। जिन घरों में बच्चों की सफलता और उनके उज्जवल भविष्य के सुनहरे सपने सजाए जा रहे थे, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और गहरा मातम पसरा हुआ है।
इस भीषण हादसे में अपनी जान गंवाने वाले युवाओं में कोई विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर बड़ा डॉक्टर बन चुका था, तो कोई देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा पास कर सरकारी अधिकारी बनने की तैयारी में जुटा था। अपनों को खोने के गम में डूबे परिजन इस दुखद सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
हादसे का शिकार हुए उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले 24 वर्षीय रवि प्रकाश ने साल 2024 में किर्गिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री पूरी की थी। पूरे परिवार में वह अकेला डॉक्टर था। वह यहां किराए के कमरे में रहकर नीट पीजी की तैयारी कर रहा था। हादसे के समय वह दोस्तों के साथ कैंटीन में था।
रेलवे अधिकारी बनने का सपना रह गया अधूरा
इस हादसे में जान गंवाने वाला बिहार के नवादा जिले का 32 वर्षीय नलिन राय इंजीनियरिंग करने के बाद रेलवे में अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परिवार में सबसे छोटा नलिन सबका लाडला था। उसके पिता संजय गांव में किसानी करते हैं।
नलिन के ममेरे भाई सोनू ने बताया कि वह हादसे से कुछ देर पहले अपने दोस्त के साथ कैंटीन में पराठा खाने गया था। उसका दोस्त दो मिनट के लिए दही लेने बाहर निकला और इतने में ही इमारत भरभराकर गिर गई। रविवार सुबह मलबे से जब नलिन को निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
वहीं हादसे का शिकार हुआ 28 वर्षीय कपिल भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में नौकरी करना चाहता था। उसने शनिवार को ही प्रतिष्ठित संस्थान में एक पद के लिए इंटरव्यू दिया था। इंटरव्यू बहुत अच्छा होने की खुशी में उसने शाम को अपने पांच दोस्तों को कैंटीन में पार्टी के लिए बुलाया था।
इमारत गिरते ही कपिल के दोस्त तो किसी तरह बच गए, लेकिन कपिल मलबे में बुरी तरह दब गया। देर रात उसे मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। रविवार दोपहर को पोस्टमार्टम के बाद उसका शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
डॉक्टर का सफेद कोट कफन में बदला
हादसे की शिकार 24 वर्षीय एकता मूल रूप से राजस्थान के अलवर की रहने वाली थी। उसने बीडीएस की पढ़ाई पूरी कर ली थी और दिल्ली में रहकर एफएमजीई परीक्षा की तैयारी कर रही थी। आगामी 28 जून को उसकी परीक्षा होने वाली थी और 25 जून को उसका जन्मदिन था।
रविवार दोपहर करीब चार बजे जब बचाव दल ने मलबे से एकता का शव बाहर निकाला, तो पिता रमेश चंद के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस प्यारी बेटी को डॉक्टर के सफेद कोट में देखने का सपना उन्होंने सालों से संजोया था, वह सफेद कफन में लिपटी हुई थी।
इस हादसे में देश के होनहार युवा डॉक्टरों की मौत से पूरा मेडिकल समुदाय गहरे सदमे में है। फेडरेशन आफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सिंह और महासचिव डॉ. मनीष जांगड़ा ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि एफएमजी और नीट-पीजी की तैयारी कर रहे इन युवा डॉक्टरों के हताहत होने की खबर से हर कोई स्तब्ध है। यह केवल कुछ होनहार छात्रों की मौत नहीं है, बल्कि देश की भावी चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी एक बहुत बड़ी अपूरणीय क्षति है।
Author: Gaurav Malhotra


