New Delhi News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के दौरान भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है. खतरनाक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारी तनाव और जोखिम के बावजूद भारतीय जहाजों ने पेट्रोलियम पदार्थों को सुरक्षित लेकर स्वदेश वापसी की है.
इस संकट के बीच भारत के कई व्यापारिक जहाज बेहद सुरक्षित तरीके से भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं. हालांकि सुरक्षा कारणों से सरकार ने इस बेहद गुप्त और जटिल मिशन की बहुत सारी रणनीतिक जानकारियों को पूरी तरह गोपनीय बनाए रखा है.
विदेश मंत्रालय की बड़ी कूटनीतिक भूमिका आई सामने
जहाजरानी मंत्रालय के शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयीय ब्रीफिंग में इस कूटनीतिक तालमेल की अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ईरान के साथ इस महत्वपूर्ण समन्वय को स्थापित करने में भारत के विदेश मंत्रालय ने बहुत बड़ी और सराहनीय भूमिका निभाई है.
मंत्रालय ने बताया कि किस जहाज को पहले निकालना है, इसकी प्राथमिकता पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और उर्वरक मंत्रालय मिलकर तय करते हैं. इसी सटीक तालमेल के आधार पर भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खतरनाक रास्ते से बाहर निकाला जाता है.
होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं तेरह भारतीय जहाज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी भारत के करीब तेरह बड़े जहाज मौजूद हैं. इस बेड़े में मुख्य रूप से एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं.
जब शिपिंग निदेशक से जहाजों के डेटा लीक होने के खतरों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील बताया. उन्होंने कहा कि पब्लिक डोमेन में मौजूद किसी भी जानकारी का गलत इस्तेमाल मुमकिन है, जो पूरी तरह विरोधी की मंशा पर निर्भर करता है.
दुनिया हैरान भारत ने युद्ध क्षेत्र से निकाले जहाज
ईरान और अमेरिका के बीच भड़के युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों का आवागमन पूरी तरह तबाह हो गया है. इसके बावजूद भारत सरकार ने अपनी बेहतरीन कूटनीति के दम पर इस संवेदनशील इलाके से अपने जहाजों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया है.
युद्ध की शुरुआत के बाद से इस संकरे रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं था. इसके बावजूद अन्य शक्तिशाली देशों के मुकाबले भारतीय जहाजों ने यहां से सबसे ज्यादा उड़ान भरी है. इन साहसी जहाजों में शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
वैश्विक संकट के इस दौर में पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्लू टायर, बीडब्यू एल्म और ग्रीन सान्वी ने भी इस सुरक्षित निकासी को सफल बनाया. भारतीय जहाजरानी मंत्रालय और नौसेना की इस संयुक्त रणनीति की चर्चा आज पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ कर रहे हैं.
Author: Pallavi Sharma

