Delhi News: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने मंगलवार को गंगा नदी को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए एक बड़ा एलान किया है। इसके तहत गंगा बेसिन के तीन प्रमुख राज्यों के दस बड़े शहर अब एक विशेष ‘एकीकृत शहरी नदी प्रबंधन योजना’ (यूआरएमपी) तैयार कर रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नदियों को कचरा और सीवेज से मुक्त रखना है।
गंगा नदी संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रम ‘नमामि गंगे’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। विभाग ने बताया कि इस नई यूआरएमपी पहल का प्राथमिक उद्देश्य शहरों के गंदे मलबे, प्लास्टिक कचरे और औद्योगिक सीवेज को पवित्र नदियों में बहने से पूरी तरह रोकना है।
दरअसल, भारत के अधिकांश ऐतिहासिक और बड़े शहर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। पुरानी व्यवस्था के कारण इन शहरों की तमाम बड़ी नालियां और सीवेज लाइनें सीधे नदी की तरफ ही खुलती हैं। इस वजह से शहरों का पूरा कचरा नदियों में जाता था, जिसे रोकने के लिए यह नया खाका तैयार किया गया है।
इन 10 शहरों से होगी अभियान की शुरुआत
इस अनूठी योजना को देश में गंगा बेसिन के दस प्रमुख शहरों के लिए अपनी तरह की पहली प्रबंधन योजना के रूप में पेश किया गया है। इस महाअभियान के पहले चरण में उत्तराखंड के तीन शहरों ऋषिकेश, हल्द्वानी-काठगोदाम और रामनगर को शामिल किया गया है, जहां से नदी का मुख्य प्रवाह शुरू होता है।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के चार महत्वपूर्ण शहरों गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर और प्रयागराज को इस योजना से जोड़ा गया है। वहीं बिहार राज्य के भी तीन प्रमुख शहरों छपरा, बक्सर और गया को इस पहले चरण का हिस्सा बनाया गया है, ताकि विस्तृत क्षेत्र में नदी की सफाई को सुनिश्चित किया जा सके।
इस महत्वाकांक्षी शहरी नदी प्रबंधन योजना के तहत, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसे ऋषिकेश से लेकर बिहार के ऐतिहासिक गया तक, सभी दस शहर अब एक ही नक्शे पर काम कर रहे हैं। इस नई सोच के तहत अब नदी को शहर का बाहरी हिस्सा न मानकर, उसे पूरे शहर का मुख्य केंद्र माना गया है।
Author: Gaurav Malhotra

