Delhi News: गर्मियों का मौसम आते ही बहुत से लोगों के शरीर में पित्त दोष बढ़ने की समस्या देखी जाती है। इस दौरान अक्सर लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं और त्वचा पर छोटे-छोटे फोड़े-फुंसी या लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं।
दरअसल, आयुर्वेद में मानव शरीर के भीतर तीन मुख्य दोष (वात, पित्त और कफ) बताए गए हैं। जब इन तीनों का संतुलन बिगड़ता है, तभी इंसान को अलग-अलग बीमारियां घेरती हैं। इसमें से पित्त का सीधा संबंध शरीर की गर्मी और पाचन क्रिया से होता है।
अगर आपके शरीर में भी पित्त की अधिकता के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत समझ जाएं कि अब बॉडी को डीटॉक्स और बैलेंस्ड करने की सख्त जरूरत है। इसके लिए आपको अपने दैनिक खानपान और जीवनशैली में कुछ बेहद जरूरी बदलाव करने होंगे।
पित्त बढ़ने के मुख्य शुरुआती लक्षण
आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में पित्त की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो सीने में तेज जलन, खट्टी डकारें आना और त्वचा पर लाल रंग के रैशेज या चकत्ते उभरने जैसी परेशानियां होने लगती हैं। इसके साथ ही आंखों में लगातार लालिमा और जलन बनी रहती है।
इसके अलावा मुंह का स्वाद कड़वा या खट्टा होना और सिर में तेज दर्द रहना भी पित्त के ही लक्षण हैं। भले ही ये सारे लक्षण बाहर की चिलचिलाती गर्मी की वजह से दिखते हों, लेकिन आयुर्वेद के नजरिए से इसका मुख्य कारण शरीर के अंदरूनी पित्त का असंतुलन ही होता है।
क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी
शरीर में पित्त को शांत करने के लिए ठंडी तासीर वाले और मीठे रसदार फलों को अपनी डाइट में शामिल करें। सब्जियों में कड़वे रस वाली चीजें जैसे करेला, खीरा, लौकी, तुरई और परवल का अधिक सेवन करें। इसके अलावा नारियल पानी, मिश्री, गुलकंद, दूध और गाय का शुद्ध घी बेहद फायदेमंद होते हैं।
फलों में पका हुआ केला, अनार और मीठे अंगूर खाएं। वहीं दूसरी तरफ, पित्त बढ़ने पर तीखे, खट्टे, चटपटे और बहुत ज्यादा नमक वाले गरिष्ठ भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। गर्मियों में ज्यादा नमक शरीर के पानी को सोख लेता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
त्वचा की देखभाल और शीतली प्राणायाम
पित्त के कारण अगर स्किन पर रैशेज हो रहे हैं, तो आयुर्वेद के अनुसार शरीर पर ठंडे तेल की मालिश (अभ्यंग) करनी चाहिए। इसके लिए नारियल का शुद्ध तेल या चंदन मिला हुआ तेल सबसे बेस्ट माना जाता है। इसे पैर के तलवों, नाभि और सिर पर लगाने से गहरी नींद आती है।
शरीर को अंदर से तुरंत ठंडा और शांत करने के लिए रोजाना ‘शीतली प्राणायाम’ का अभ्यास करें। इसे करने के लिए अपनी जीभ को बाहर निकालकर एक नली (ट्यूब) जैसा आकार दें और मुंह से लंबी गहरी सांस खींचें। कुछ सेकेंड सांस रोकने के बाद नाक से धीरे-धीरे बाहर छोड़ें।
Author: Asha Thakur

