मिडिल ईस्ट में फिर भड़का युद्ध: कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, भारी उछाल से दुनिया भर में मची खलबली!

Global News: मध्य-पूर्व एशिया में गहराते सैन्य तनाव का सीधा और बेहद गंभीर असर वैश्विक तेल व्यापार पर दिखने लगा है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर 2 प्रतिशत से अधिक की भारी उछाल दर्ज की गई है।

वैश्विक बाजार में आई इस अचानक तेजी का मुख्य कारण इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए नए घातक हमले हैं। इजरायली सरकार ने अपनी सेना को लेबनान सीमा के भीतर और आगे बढ़ने के सख्त आदेश दे दिए हैं, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन गई है।

इजरायल ने यह आक्रामक फैसला ठीक ऐसे वक्त में लिया है, जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम यानी सीजफायर का ऐलान हुए छह हफ्ते से अधिक का समय बीत चुका था। हालांकि, इस सीजफायर के औपचारिक ऐलान के बाद भी जमीनी स्तर पर शांति स्थापित नहीं हो सकी है।

93 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत 2.37 डॉलर या 2.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 89.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.16 डॉलर बढ़कर 93.28 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते इस संघर्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम विस्तार की उम्मीदों को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। इससे पहले वाशिंगटन में हुई शांति वार्ता के बाद बाजार को जो थोड़ी राहत मिली थी, वह अब खत्म हो गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का बड़ा खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि वह जल्द ही ईरान के साथ शांति प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेंगे। इस समझौते का मकसद क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना था, लेकिन ईरान की शर्त है कि किसी भी व्यापक वैश्विक समझौते में हिजबुल्लाह को जरूर शामिल किया जाए।

इस बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी वैश्विक चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान द्वारा समुद्री माइंस बिछाए जाने की आशंका से इस जलमार्ग के पूरी तरह खुलने में काफी देरी हो सकती है।

पूरी दुनिया के कुल तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस रूट के बाधित होने से आने वाले दिनों में कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

Author: Rajesh Kumar

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