तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक धमाका, क्या बीजेपी से अलग होकर नई पार्टी बनाएंगे पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई?

Tamil Nadu News: तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई राज्य की राजनीति में एक नया आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई जल्द ही ‘मक्कल शक्ति अय्यकम’ यानी जन शक्ति आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है।

चर्चाओं के अनुसार यह नया आंदोलन भविष्य में उनकी एक अलग राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। हालांकि खुद अन्नामलाई ने अभी तक नई पार्टी बनाने के इन दावों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस ने इस खबर पर तंज कसा है।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर भाजपा का मज़ाक उड़ाते हुए लिखा कि राज्य में एक और नई राजनीतिक पार्टी बनने वाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई अपने स्वयंसेवी संगठन ‘वी द लीडर्स’ एनजीओ के जरिए युवाओं को जोड़ रहे हैं।

वह इस आंदोलन के माध्यम से युवाओं को राजनीति में आने के लिए विशेष ट्रेनिंग देंगे। अन्नामलाई का लक्ष्य समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लाकर एक बेहद मजबूत कैडर तैयार करना है। इधर, इस नए कदम के बीच उनके समर्थक पूरी ताकत से उनके साथ खड़े हैं।

तीन भाषा नीति पर केंद्र से मतभेद के बाद उठाया कदम

अन्नामलाई का पार्टी बनाने का यह विचार केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति पर उपजे मतभेदों के बाद सामने आया है। उन्होंने कक्षा 9 के छात्रों के लिए सीबीएसई के तीन-भाषा फॉर्मूले को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई थी। इसके बाद ही यह विवाद गहरा गया।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि तीन भाषा नीति से तमिलनाडु के छात्रों और अभिभावकों को भारी मानसिक तनाव हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक अन्नामलाई राज्य में इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सबसे बड़े समर्थक थे।

जब पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सत्तारूढ़ डीएमके ने केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया था, तब अन्नामलाई ने उनका कड़ा विरोध किया था। हालांकि अब उन्होंने नीति के अचानक लागू होने पर आपत्ति जताई है, जिससे हर कोई काफी हैरान है।

अन्नामलाई के इस बदले रुख के बीच भाजपा प्रदेश सचिव विनोद पी. सेल्वम ने उनका बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अन्नामलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इस तरह की अफवाहों का जवाब केवल अन्नामलाई ही सही तरीके से दे सकते हैं।

आईपीएस की नौकरी छोड़ 2020 में रखा था राजनीति में कदम

पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने साल 2020 में अपनी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था। भाजपा ने साल 2021 में एल. मुरुगन की जगह उन्हें तमिलनाडु भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया था। उन्होंने साल 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला।

तमिलनाडु भाजपा में एक नई ऊर्जा और आक्रामकता भरने का पूरा श्रेय अन्नामलाई को ही दिया जाता है। उनकी बेबाक शैली के कारण दिल्ली के केंद्रीय नेता भी उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुनते थे। लेकिन कुछ बयानों ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं।

अन्नामलाई द्वारा सीएन अन्नादुरई और जे. जयललिता पर की गई टिप्पणियों से सहयोगी दल एआईएडीएमके बेहद नाराज हो गया था। इस कड़वाहट के कारण दोनों पार्टियों का पुराना गठबंधन टूट गया और चुनाव में दोनों ही दलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इसके बाद जब दोबारा गठबंधन की बातचीत शुरू हुई, तो एआईएडीएमके प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने भाजपा नेतृत्व बदलने की शर्त रख दी। इसके बाद भाजपा ने अन्नामलाई को हटाकर नैनार नागेंद्रन को नया अध्यक्ष बना दिया। अन्नामलाई ने अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है।

Author: Karthik Srinivasan

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