Mehrauli Building Collapse: दिल्ली के सैदुलाजाब में पांच मंजिला इमारत गिरने से 6 की मौत, मलबे में अभी भी कई जिंदगी दबी!

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के महरौली थाना क्षेत्र स्थित सैदुलाजाब इलाके में एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत भरभराकर ढह गई। इस भीषण हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने रविवार शाम तक मलबे से कुल चौदह लोगों को बाहर निकाला। इनमें से छह लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान रवि, कपिल, नलिन रे, आलोक, पार्वती और एकता के रूप में हुई है।

इस हादसे में बचाए गए दस लोगों में से आठ गंभीर घायलों का इलाज इस समय एम्स अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद पांच लोगों को घर भेज दिया है। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।

भवन स्वामी और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज

महरौली थाना पुलिस ने इस दर्दनाक मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में गैर इरादतन हत्या समेत बीएनएस की अन्य गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज कर ली है। हादसे के बाद से ही भवन स्वामी कर्मवीर जेलदार, बिल्डर मनीष खत्री और ठेकेदार सिराज मौके से फरार हैं।

दिल्ली पुलिस की चार अलग-अलग विशेष टीमें फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। उधर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुबह ही घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेटी जांच कराने के कड़े आदेश दिए हैं।

इस बीच दिल्ली नगर निगम (MCD) ने भी लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने इस क्षेत्र के संबंधित जेई और एई को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। घटनास्थल पर पिछले चौबीस घंटे से भी ज्यादा समय से राहत कार्य जारी है।

एनडीआरएफ के सूत्रों के अनुसार मौके पर मलबे के बीच दबे लोगों की तलाश के लिए आधुनिक मशीनों और डॉग स्क्वाड की मदद ली जा रही है। मलबा लगभग तीन हजार वर्ग फीट के बड़े दायरे में फैला है, जिसे पूरी तरह हटाने में अभी लंबा समय लग सकता है।

संसाधनों की कमी से रेस्क्यू में हुई देरी

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि हादसे के तुरंत बाद बचाव कार्य तो शुरू हो गया था, लेकिन मौके पर बड़ी क्रेन पंद्रह घंटे बाद पहुंची। इसके कारण मलबे को जल्दी नहीं हटाया जा सका। यदि समय रहते क्रेन आ जाती तो कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

मृतक पार्वती की बेटी नीलम ने रोते हुए बताया कि रात करीब साढ़े बारह बजे तक मलबे के नीचे से उसकी मां के बचाने की आवाज आ रही थी। लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने से उन्हें समय पर नहीं निकाला जा सका। उनका शव करीब साढ़े अट्ठारह घंटे बाद बाहर आया।

एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि हादसे की मुख्य वजह पिलर का अचानक फटना रहा है। यह इमारत काफी पुरानी थी, जिसे शुरुआत में बेसमेंट और तीन मंजिल के लोड के हिसाब से बनाया गया था। इसकी नींव ज्यादा वजन संभालने के लिए तैयार नहीं थी।

भवन स्वामी ने पिलरों को मजबूत किए बिना इसके ऊपर पहले दो और मंजिलें खड़ी कर दीं। पिछले डेढ़ महीने से इस पर एक और नए तल का निर्माण कार्य चल रहा था। अत्यधिक वजन बढ़ने के कारण इसके मुख्य पिलर अचानक फट गए और पूरी इमारत ढह गई।

कोचिंग और कैंटीन के छात्र बने शिकार

सैदुलाजाब की यह इमारत करीब चार सौ गज के दायरे में बनी हुई थी। गली नंबर पांच में स्थित यह बिल्डिंग एक नामी कोचिंग इंस्टीट्यूट और कैंटीन के बिल्कुल बीच में थी। हादसे के वक्त कोचिंग के कई छात्र पास की कैंटीन में बैठकर दोपहर का खाना खा रहे थे।

इमारत गिरते ही उसका भारी-भरकम मलबा इस ढाबे की टिन शेड वाली छत पर जा गिरा। इसके चलते वहां खाना खा रहे छात्र और कर्मचारी मलबे के नीचे बुरी तरह दब गए। मलबे के नीचे से क्षितिज प्रताप, नीलम यादव, अनुज दीक्षित और तरुण को घायल अवस्था में निकाला गया।

इसके अलावा मलबे की चपेट में आने से साइका खान, आस्था, आदित्य शर्मा और विशाल भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कैंटीन के मलबे को पूरी तरह साफ करने का काम अभी भी जारी है। पुलिस को आशंका है कि नीचे से कुछ और शव निकल सकते हैं।

Author: Gaurav Malhotra

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