Delhi News: महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में खुद को दोषी ठहराए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण की मांग को लेकर किया गया प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लांबा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताते हुए लड़ाई जारी रखने की बात कही।
अलका लांबा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें पहले से इस फैसले की आशंका थी। उन्होंने बताया कि यह मामला जुलाई 2024 का है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था। उस दौरान महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जंतर-मंतर पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर प्रदर्शन किया था।
महिला सुरक्षा और आरक्षण था प्रदर्शन का मुद्दा
लांबा के अनुसार प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। प्रदर्शनकारी संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर अपनी मांगें लोकतांत्रिक तरीके से रख रहे थे।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने दबाव में आकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। बाद में मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक वह लगातार अदालत में पेश होती रही हैं और अब उन्हें दोषी ठहराया गया है।
पुलिस के आरोपों को बताया गलत
अलका लांबा ने कहा कि पुलिस ने उन पर पुलिसकर्मियों पर हमला करने और ड्यूटी में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने इन आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक प्रदर्शन में शामिल महिलाएं निहत्थी थीं और किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पूरे मामले में केवल उन्हें ही आरोपी बनाया गया, जबकि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। लांबा ने कहा कि उनका अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।
महिलाओं की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और इसे लेकर समाज में चिंता का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग सुरक्षा और न्याय की मांग करते हैं, तो उन्हें ही निशाना बनाया जाता है। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक विरोध को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है।
अलका लांबा ने कहा कि वह किसी भी सजा से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई को आगे भी मजबूती से जारी रखा जाएगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
Author: Harikarishan Sharma

