ट्रम्प के दावे पर ईरान का बड़ा पलटवार: क्या वाकई शुरू हो गई है बातचीत या ये सिर्फ एक सियासी ड्रामा है?

Iran News: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी ने एक नया मोड़ ले लिया है। डोनाल्ड ट्रम्प के उस दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने की बात कही थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ लहजे में कहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच फिलहाल कोई संवाद नहीं हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात और अमेरिकी सत्ता के भविष्य पर टिकी हैं।

ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प के दावों को झूठा करार दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत की खबरें महज अफवाह हैं और हकीकत इससे कोसों दूर है। ईरान का यह सख्त रुख बताता है कि वह अमेरिका की नई संभावित सरकार को लेकर काफी सतर्क है। तेहरान ने साफ किया है कि वह किसी भी दबाव में आकर मेज पर बैठने को तैयार नहीं है।

दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रम्प लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि उनके राष्ट्रपति बनने पर स्थितियां बदल जाएंगी। ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान उनसे बात करने के लिए बेताब है। उनके इस बयान को कई विशेषज्ञ चुनावी हथकंडा मान रहे हैं। लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका की खोखली धमकियों या दावों से प्रभावित होने वाला नहीं है।

कूटनीति की बिसात पर शह और मात: आखिर सच क्या है?

ईरान और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट कोई नई बात नहीं है। ट्रम्प के पिछले कार्यकाल में परमाणु समझौते से बाहर निकलने के फैसले ने आग में घी का काम किया था। अब फिर से ट्रम्प की वापसी की आहट ने तेहरान को चौकन्ना कर दिया है। बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान की विदेश नीति उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है, न कि किसी विदेशी नेता के बयानों पर।

क्षेत्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस बयानबाजी के पीछे एक गहरा रणनीतिक खेल चल रहा है। ईरान नहीं चाहता कि वह कमजोर दिखे, वहीं ट्रम्प खुद को एक कुशल मध्यस्थ के रूप में पेश करना चाहते हैं। इस खींचतान में आम नागरिक और वैश्विक अर्थव्यवस्था पिस रही है। तेल की कीमतों से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक, सब कुछ इसी संवादहीनता पर टिका है।

ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका अपने रवैये में बदलाव लाता है, तभी भविष्य में बातचीत संभव है। फिलहाल, वाशिंगटन की ओर से कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है जो ट्रम्प के दावों का समर्थन करती हो। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तथ्यों को देखें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

प्रतिबंधों का साया और परमाणु कार्यक्रम की चुनौती

ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद वह अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने के मूड में नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रतिबंधों में ढील नहीं मिलती, ईरान किसी भी औपचारिक वार्ता के लिए कदम आगे नहीं बढ़ाएगा। ट्रम्प का ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाला तरीका पहले भी खास सफल नहीं रहा था।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की यह प्रतिक्रिया काफी अहम मानी जा रही है। लेबनान से लेकर गाजा तक मची तबाही ने कूटनीतिक रास्तों को और भी संकरा कर दिया है। ऐसे में ट्रम्प के दावों को ईरान ने एक सिरे से खारिज कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि अमेरिका के आने वाले प्रशासन का इस पर क्या रुख रहता है।

दुनियाभर के कूटनीतिज्ञ इस घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं। ईरान का रुख सख्त है और ट्रम्प के दावे हवा-हवाई लग रहे हैं। क्या भविष्य में पर्दे के पीछे कोई खिचड़ी पकेगी, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, दोनों देशों के बीच की खाई पहले से ज्यादा चौड़ी नजर आ रही है। तेहरान ने अपनी संप्रभुता से समझौता न करने की कसम दोहराई है।

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