Gujarat News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स के ऐतिहासिक अफस्लूटडाइक बांध का दौरा करके भारत में जल क्रांति की नींव रख दी है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को क्रांतिकारी और अद्भुत बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस आधुनिक तकनीक सीखकर अपने यहां पानी की किल्लत और बिजली संकट को हमेशा के लिए खत्म करेगा।
नीदरलैंड्स का 92 साल पुराना बांध क्यों है बेहद खास
यह करीब 32 किलोमीटर लंबा एक ऐतिहासिक समुद्री बांध है। इसे लगभग 90 साल पहले समुद्र के खारे पानी को रोकने के लिए बनाया गया था। इस बांध ने खारे पानी को रोककर अंदर की तरफ ‘इज्सेलमीर’ नाम की मीठे पानी की दुनिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील बना दी।
इस अनूठे बांध ने नीदरलैंड्स को विनाशकारी बाढ़ से बचाया है। साथ ही इस निचले देश को पीने और खेती के लिए भरपूर मीठा पानी दिया। पीएम मोदी ने कहा कि नीदरलैंड्स ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी कार्य किया है। पूरा वैश्विक समुदाय उसके इस बेहतरीन अनुभव से बड़ी सीख ले सकता है।
गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसार परियोजना का बदलेगा भाग्य
भारत की कल्पसार परियोजना का लक्ष्य भी खंभात की खाड़ी के पार 30 किलोमीटर लंबा बांध बनाना है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह बांध गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसार परियोजना के लिए सीधा इंजीनियरिंग समाधान देगा। यह जलाशय समुद्री वातावरण में दुनिया का सबसे बड़ा ताजे पानी का स्रोत बनेगा।
इस विशाल जलाशय में नर्मदा, माही, साबरमती और ढाढर जैसी नदियों का लगभग 10 अरब क्यूबिक मीटर मीठा पानी जमा होगा। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई, पीने और औद्योगिक जरूरतों के लिए होगा। इससे सौराष्ट्र के पानी की कमी वाले इलाकों और दक्षिण गुजरात को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
समुद्री बांध से दूरी होगी कम और पैदा होगी बिजली
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत बांध के ऊपर एक शानदार 10-लेन का ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनेगा। इससे सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच की यात्रा दूरी 200 किलोमीटर से भी ज्यादा कम हो जाएगी। इस बांध पर समुद्र की लहरों और सौर ऊर्जा से भारी मात्रा में बिजली बनाई जाएगी।
यह बांध समुद्र के बढ़ते जलस्तर और खतरनाक चक्रवातों से तटीय इलाकों की पूरी रक्षा करेगा। दोनों देशों ने कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार नीदरलैंड की सफल तकनीक को अब अपने देश की तरक्की के लिए लागू कर रही है।
Author: Smit Patel

