लिपुलेख विवाद के बीच नेपाल के विदेश मंत्री का भारत दौरा अचानक रद्द, जानिए कूटनीतिक गलियारों में मचे हड़कंप का सच

International News: भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक रिश्तों में अचानक कड़वाहट आ गई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का प्रस्तावित भारत दौरा ऐन मौके पर रद्द हो गया है। लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर काठमांडू ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद उपजे भारी तनाव के कारण दोनों देशों की महत्वपूर्ण वार्ताएं फिलहाल रुक गई हैं।

शिशिर खनाल को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ शिखर सम्मेलन का न्योता मिला था। भारत सरकार ने फिलहाल इस वैश्विक सम्मेलन को स्थगित कर दिया है। जानकारों के अनुसार अफ्रीकी देशों में फैले इबोला वायरस के प्रकोप के कारण यह बड़ा फैसला लिया गया है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पीएम बालेन शाह के कड़े प्रोटोकॉल ने बढ़ाई कूटनीतिक दूरियां

नेपाल में बालेन्द्र (बालेन) शाह के नेतृत्व में बनी नई सरकार के बाद रिश्तों में बड़े बदलाव दिख रहे हैं। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी दो दिवसीय नेपाल दौरे पर जाने वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर उनका यह दौरा भी टल गया। इस कूटनीतिक गतिरोध के पीछे नेपाल के प्रधानमंत्री का सख्त रवैया माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी सरकार के शुरुआती दिनों में बेहद आक्रामक और राष्ट्रवादी रुख अपना रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अपने समकक्ष से नीचे के किसी भी विदेशी अधिकारी से मुलाकात नहीं करेंगे। इसी नीति के तहत उन्होंने भारतीय विदेश सचिव और अमेरिकी दूत से मिलने से साफ इनकार कर दिया था।

कालापानी और लिपुलेख सीमा पर नेपाल का कड़ा रुख

भारतीय विदेश सचिव के दौरे से ठीक पहले नेपाल ने भारत और चीन दोनों को औपचारिक विरोध पत्र भेजा था। नेपाल ने इस पत्र में दावा किया है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके संप्रभु हिस्से हैं। इस एकतरफा कड़े रुख ने नई दिल्ली और काठमांडू के बीच बातचीत का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना दिया है।

इसके साथ ही नेपाल की नई सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर नया सीमा शुल्क लगा दिया है। इस आर्थिक फैसले से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों का दैनिक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस अप्रत्याशित कदम ने भी भारत सरकार की चिंताओं को काफी हद तक बढ़ा दिया है।

रेलवे प्रोजेक्ट और हवाई मार्गों पर अटका कूटनीतिक पेंच

द्विपक्षीय वार्ता टलने से कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर पेंच फंस गया है। अगर यह बैठक होती तो जनकपुर और अयोध्या के बीच रेलवे लाइन के निर्माण पर बात आगे बढ़ती। इसके अलावा पोखरा और भैरहवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के लिए अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों की नेपाल की पुरानी मांग पर भी चर्चा होनी थी।

नेपाली पक्ष इस दौरे के माध्यम से भारत से चीनी निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटवाना चाहता था। साथ ही दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर क्यूआर पेमेंट को पूरी तरह चालू करने पर भी सहमति बननी थी। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अब दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच सीधी बातचीत ही इस गतिरोध को दूर कर सकती है।

Author: Pallavi Sharma

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