47 करोड़ की लागत से बना अनोखा ‘ग्रीन ब्रिज’, इंसान नहीं बल्कि मेंढक-सांप होंगे इसके इस्तेमालकर्ता, जानें क्या है पूरा मामला

UK News: ब्रिटेन के सरे क्षेत्र में अगले महीने एक अनोखे पुल का उद्घाटन होने जा रहा है। यह कोई साधारण पुल नहीं बल्कि वन्यजीवों के लिए बनाया गया एक विशेष ‘ग्रीन ब्रिज’ है। करीब 68 मीटर लंबा यह कॉकक्रो ब्रिज व्यस्त A3 रोड के ऊपर बनकर तैयार हो चुका है। इस पुल को पूरी तरह से झाड़ियों और घास से ढक दिया गया है ताकि यह प्राकृतिक पर्यावास जैसा दिखे। इसकी अनुमानित लागत लगभग 3.7 मिलियन पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में करीब 47 करोड़ रुपये आंकी गई है।

यह पुल मुख्य रूप से सड़क पार करने वाले छोटे जीवों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य मेंढकों, सांपों और अन्य रेंगने वाले जीवों को व्यस्त राजमार्ग पार करने के दौरान वाहनों की चपेट में आने से बचाना है। माना जा रहा है कि यह पूरे ब्रिटेन में अपनी तरह का पहला और अनूठा प्रयोग है। यह दो महत्वपूर्ण हीथलैंड क्षेत्रों को जोड़ने का काम करेगा जो दशकों पहले सड़क निर्माण के कारण एक दूसरे से कट गए थे।

सड़क ने तोड़ा था प्रकृति का संपर्क, अब पुल करेगा दोबारा कनेक्ट

यह ग्रीन ब्रिज उन दो हीथलैंड्स को जोड़ता है जिन्हें ओखम और विस्ले कॉमन्स के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1970 के दशक में जब यहां A3 रोड का निर्माण हुआ था तो यह विशाल प्राकृतिक क्षेत्र स्थायी रूप से दो हिस्सों में बंट गया था। इस विभाजन के कारण वहां रहने वाले जीवों का आपसी संपर्क टूट गया था और उनकी आबादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि पहले इसी स्थान पर पैदल यात्रियों के लिए एक साधारण पुल हुआ करता था।

अब उस पुराने पैदल पुल की जगह इस नए और आधुनिक ‘ग्रीन ब्रिज’ ने ले ली है। नेशनल हाईवेज के अधिकारियों का कहना है कि यह पुल A3 मार्ग के दोनों ओर फैले कॉमन्स को फिर से एक सूत्र में पिरोएगा। इससे स्थानीय वन्यजीवों के आवागमन के लिए एक प्राकृतिक और पूरी तरह से सुरक्षित गलियारा तैयार हो जाएगा। यह पुल लगभग 60 मीटर लंबा है और इसकी चौड़ाई 30 मीटर रखी गई है।

सरीसृपों और कीटों को ध्यान में रखकर किया गया डिजाइन

इस पुल के डिजाइन को तैयार करते समय इंजीनियरों ने विशेष रूप से सरीसृपों और अकशेरुकी जीवों की जरूरतों का ध्यान रखा है। इस ब्रिज पर लगाई गई झाड़ियां और घास सांपों और छिपकलियों को छिपने के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करेंगी। पर्यावरण संरक्षणवादियों को उम्मीद है कि यह प्रयोग घास में रहने वाले ग्रास स्नेक, एडर और धीमी गति वाले कीड़ों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इसके अलावा बिज्जू और चमगादड़ जैसे स्तनधारी भी इस पुल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह पुल न केवल रेंगने वाले जीवों के लिए बल्कि पक्षियों के पर्यावास को संरक्षित करने में भी सहायक होगा। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियां जैसे नाइटजार और डार्टफोर्ड वॉबलर पक्षी प्रजनन के लिए इन्हीं हीथलैंड्स पर निर्भर हैं। पुल के बन जाने से इनके आवास क्षेत्र में और वृद्धि होगी तथा इनकी घटती आबादी को संभलने का मौका मिलेगा। यह पूरा प्रोजेक्ट जैव विविधता को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल है।

नेशनल हाईवेज ने माना- सड़कें बनती हैं प्रकृति के लिए बाधा

ब्रिटेन के मुख्य राजमार्गों का रखरखाव करने वाली संस्था नेशनल हाईवेज ने इस पुल के निर्माण के पीछे की वैज्ञानिक सोच को स्पष्ट किया है। संस्था में पर्यावरणीय स्थिरता के निदेशक स्टीव एल्डरकिन ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भले ही सड़कें मानव सभ्यता और शहरों को जोड़ने का काम करती हैं लेकिन वे प्रकृति के लिए एक गंभीर रुकावट साबित होती हैं। ये सड़कें वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को टुकड़ों में बांट देती हैं।

एल्डरकिन ने आगे कहा कि इस विखंडन के कारण जैव विविधता में लगातार कमी देखने को मिल रही है। कई बार जानवर सड़क पार करने के प्रयास में दुर्घटनाग्रस्त होकर मारे जाते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर इस ग्रीन ब्रिज का निर्माण किया गया है। उनका मानना है कि यह पुल प्रकृति के दो अलग हुए हिस्सों के बीच फिर से संपर्क स्थापित करने का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा।

मेंढक और टोड की सुरक्षा बनी प्राथमिकता

इस पुल के निर्माण में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इसे विशेष तौर पर उभयचर जीवों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। हर साल बारिश के मौसम में हजारों की संख्या में मेंढक और टोड प्रजनन के लिए तालाबों की ओर पलायन करते हैं। इस दौरान उन्हें सड़कें पार करनी पड़ती हैं जहां तेज रफ्तार वाहनों के नीचे आकर उनकी सामूहिक मौत हो जाती है। यह ग्रीन ब्रिज ऐसे नन्हें जीवों को सुरक्षित आवाजाही का विकल्प देगा।

यह पुल सिर्फ एक ढांचा नहीं है बल्कि यह एक कृत्रिम पर्यावास के रूप में कार्य करेगा। पुल की सतह पर उगाई गई वनस्पतियां और मिट्टी की परत इसे एक प्राकृतिक मैदान का रूप देती है। इससे जानवरों को यह आभास ही नहीं होगा कि वे एक व्यस्त सड़क के ऊपर से गुजर रहे हैं। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक संतुलन स्थापित किया जा सकता है। अगले महीने इसके खुलने के बाद इसकी सफलता पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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