Delhi News: देश में नीट परीक्षा विवाद के बीच टेलीग्राम ऐप को 22 जून तक ब्लॉक कर दिया गया है। भारत सरकार के इस कड़े कदम पर अब कंपनी के फाउंडर और सीईओ पावेल ड्यूरोव की पहली तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वे इस सरकारी फैसले से काफी बिफरे हुए नजर आ रहे हैं।
पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि ऐप पर पाबंदी लगाना भारत के 15 करोड़ आम टेलीग्राम यूजर्स को सजा देने जैसा है। सरकार का यह एक्शन उन असली अपराधियों को नहीं रोकता जिन्होंने असलियत में परीक्षा का मटीरियल लीक किया था।
सीईओ ने कहा- गलत तारीख दिखाकर किया जा रहा फ्रॉड
सीईओ ड्यूरोव ने बताया कि भारत के आईटी मंत्रालय ने लीक क्वेश्चन पेपर शेयर होने के आरोप में ऐप को एक हफ्ते के लिए प्रतिबंधित किया है। उन्होंने दावा किया कि टेलीग्राम ने पिछले कुछ हफ्तों में पेपर लीक और घोटालों को बढ़ावा देने वाले सैकड़ों चैनल्स को तुरंत डिलीट किया है।
उन्होंने कहा कि कंपनी अब ‘एडिटेड’ लेबल को अधिक स्पष्ट दिखाने की तकनीक पर काम कर रही है। इससे पुरानी तारीख दिखाकर किया जाने वाला फ्रॉड पूरी तरह रुक जाएगा। पावेल ड्यूरोव ने भारत जैसे बड़े देश में टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाने को प्रशासन की एक बहुत बड़ी भूल बताया है।
वॉट्सऐप और सिग्नल जैसे दूसरे ऐप्स पर भी उठाए सवाल
पावेल ड्यूरोव ने अपनी पोस्ट में चालाकी से वॉट्सऐप और सिग्नल जैसे दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स का भी जिक्र किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाबंदी लगाने से कुछ भी नहीं रुका है। गैरकानूनी चीजें शेयर करने वाले लोग अब दूसरे मैसेजिंग ऐप्स पर पूरी तरह शिफ्ट हो चुके हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि केवल टेलीग्राम को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? लीक हुए क्वेश्चन पेपर दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर भी आसानी से सर्कुलेट किए जा सकते हैं। टेलीग्राम की छवि को इस बैन से भारी नुकसान पहुंचा है। इससे समाज में ऐप पर अनचाही गतिविधियां होने का संदेश गया है।
मैसेज एडिटिंग फीचर का गलत इस्तेमाल कर बनाया जा रहा फर्जी सबूत
भारत सरकार ने सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए ही टेलीग्राम पर यह बड़ी कार्रवाई की है। परीक्षा आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने साफ किया है कि पेपर लीक के झूठे सबूत बनाने के लिए टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर का दुरुपयोग किया जा रहा था।
एनटीए के अनुसार, चैनल के एडमिनिस्ट्रेटर पुरानी पोस्ट को आसानी से एडिट कर देते थे। वे परीक्षा खत्म होने के बाद पुरानी तारीख वाली पोस्ट में ओरिजिनल क्वेश्चन पेपर अटैच कर देते थे। इससे ओरिजिनल टाइमस्टैम्प वही रहता था और ऐसा दिखाया जाता था कि पेपर परीक्षा से पहले लीक हुआ था।
इन फर्जी पोस्ट को सोशल मीडिया पर सबूत के तौर पर सर्कुलेट करके देश में भ्रम फैलाया जा रहा था। अधिकारियों का मानना है कि टेलीग्राम पर कुछ दिनों की रोक लगाने से ऐसी साजिशों को रोका जा सकेगा। देश में मैसेज एडिट करने की सुविधा को भी 30 जून तक बंद कर दिया गया है।
Reported By: Mohit


