World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी भीषण तनाव और युद्ध को समाप्त करने के लिए रविवार को ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि इस महासौदे पर आज ही हस्ताक्षर होना तय है। इस पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता ‘होर्मुज स्ट्रेट’ सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा।
हालांकि, इस बड़े दावे के बीच ईरान सरकार की तरफ से जो आधिकारिक बयान आया है, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सस्पेंस को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें रविवार को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली परदे के पीछे की हलचलों पर टिक गई हैं।
ओबामा की पुरानी नीति पर ट्रंप का तीखा हमला
डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए ऐतिहासिक समझौते की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई मशहूर ‘जेसीपीओए’ न्यूक्लियर डील से की है। ओबामा पर तीखा हमला बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बराक हुसैन ओबामा का पुराना समझौता परमाणु हथियार बनाने का एक आसान रास्ता था।
ट्रंप ने आगे लिखा कि अगर वो पुरानी डील जारी रहती, तो ईरान 6 साल पहले ही परमाणु बम हासिल कर चुका होता और अब तक उसका इस्तेमाल भी कर लेता। लेकिन ईरान के साथ मेरा ये नया समझौता उसके बिल्कुल विपरीत है। यह खतरनाक परमाणु हथियारों के सामने खड़ी एक अभेद्य फौलादी दीवार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूरा भरोसा जताया कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता है। इसके साथ ही वह भविष्य में भी इन्हें कभी हासिल नहीं कर पाएगा। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका इस बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी में है।
परमाणु धूल को नष्ट करने के लिए बी-2 बॉम्बर्स तैयार
इस नई डील के तकनीकी पहलुओं का जिक्र करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका अब ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लेगा। ट्रंप ने बेहद आक्रामक अंदाज में लिखा कि उचित समय पर, जब सब कुछ शांत हो जाएगा, हम सीधे अंदर दाखिल होंगे।
हम शक्तिशाली ग्रेनाइट पहाड़ों के नीचे दबी परमाणु धूल को बाहर निकालेंगे। इसके लिए हमारे खूबसूरत बी-2 बॉम्बर्स और उनके शानदार पायलटों को अग्रिम धन्यवाद। हम इस यूरेनियम को डाउनब्लेंड करके हमेशा के लिए नष्ट कर देंगे, चाहे वह ईरान में हो या संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित हो।
इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि उम्मीद है यह पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना के पास ‘अंतिम सैन्य विकल्प’ हमेशा खुला है। ट्रंप की इस धमकी से खाड़ी देशों में खलबली मच गई है।
ईरान ने अमेरिकी दावों को सिरे से नकारा
एक तरफ जहां राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते को लेकर रविवार की तारीख पक्की मान रहे हैं, वहीं ईरान ने इस दावे पर पानी फेर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघई ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए साफ कहा कि रविवार को कोई हस्ताक्षर नहीं होंगे।
प्रवक्ता बघई ने कहा कि रविवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी ‘इस्लामाबाद ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में समझौते की संभावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अभी अमेरिकी प्रशासन का रवैया काफी ढुलमुल और हिचकिचाहट से भरा है।
ईरान के अनुसार अमेरिकी प्रशासन की अस्थिरता को देखते हुए हमें हस्ताक्षर की किसी भी तय तारीख पर टिप्पणी करने से पूरी तरह बचना चाहिए। इस मामले में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। ईरान के इस पलटवार के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक युद्ध तेज हो गया है।
Author: Pallavi Sharma


