GST विवादों से हैं परेशान? 30 जून से पहले निपटा लें काम, वरना बंद हो जाएगा सरकारी पोर्टल!

Patna News: बिहार के उद्यमियों, व्यापारियों और करदाताओं के लिए एक बेहद जरूरी और समय-संवेदनशील खबर है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े विवादों के त्वरित और पारदर्शी निपटारे के लिए गठित जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) को लेकर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (BIA) परिसर में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस विशेष कार्यक्रम में न्यायाधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योगपतियों और कर सलाहकारों को अपील प्रक्रिया, ई-फाइलिंग और समयसीमा से जुड़ी कई जानकारियां दीं। कार्यक्रम में न्यायाधिकरण के वाइस प्रेसिडेंट मनोज शंकर, न्यायिक सदस्य मनोज कुमार सिन्हा और तकनीकी सदस्य संजय कुमार मावड़िया मुख्य रूप से मौजूद रहे।

30 जून 2026 है अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख

वाइस प्रेसिडेंट मनोज शंकर ने व्यापारियों को सचेत करते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से पहले जीएसटी के तहत जारी किए गए किसी भी आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तय की गई है। इस तारीख के बाद सरकारी पोर्टल पूरी तरह बंद हो जाएगा।

अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद किसी भी करदाता को अपील दाखिल करने का दोबारा मौका नहीं मिलेगा। इसलिए सभी उद्यमी कानूनी पचड़ों और भारी नुकसान से बचने के लिए समय रहते अपनी ऑनलाइन अपील जरूर दर्ज करा लें ताकि उनके मामले सुने जा सकें।

देशभर में 16 हजार से अधिक केस, बिहार फिसड्डी

तकनीकी सदस्य संजय कुमार मावड़िया ने बताया कि पूरे देश में अब तक लगभग 16,500 अपीलें न्यायाधिकरण के सामने आ चुकी हैं। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा। हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बिहार से अब तक महज 210 अपीलें ही दर्ज हुई हैं, जो उम्मीद से काफी कम हैं।

करदाताओं की सुविधा के लिए न्यायिक सदस्य मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि न्यायाधिकरण परिसर में एक विशेष हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। यदि किसी भी कारोबारी को ई-फाइलिंग के दौरान कोई तकनीकी या प्रक्रियागत दिक्कत आती है, तो वे सीधे इस हेल्प डेस्क पर जाकर मुफ्त सहायता और मार्गदर्शन ले सकते हैं।

जानिए कितना लगेगा शुल्क और क्या है नियम

न्यायाधिकरण के सहायक निबंधक राजीव कुमार पांडेय ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए पूरी प्रक्रिया समझाई। वर्तमान नियमों के तहत विवादित टैक्स राशि के प्रति एक लाख रुपये पर 1 फीसदी का फाइलिंग शुल्क तय किया गया है। इसमें न्यूनतम फीस 5,000 रुपये और अधिकतम सीमा 25,000 रुपये निर्धारित है।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में बीआइए (BIA) की टैक्सेशन कमेटी के अध्यक्ष आलोक पोद्दार और मेंटर अरुण खोवाला ने ई-फाइलिंग प्रणाली से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और तकनीकी कमियों की ओर अधिकारियों का ध्यान खींचा। इसके साथ ही कारोबारियों ने व्यवस्था को और सरल बनाने के लिए अपने जरूरी सुझाव भी सौंपे।

Author: Amit Yadav

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