Delhi News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद भत्तों, सैलरी हाइक और एरियर की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आयोग की सिफारिशें लागू होने पर कर्मचारियों के बैंक खातों में एकमुश्त बड़ी रकम आने की पूरी उम्मीद है।
इस बड़े वित्तीय लाभ के साथ ही एक बेहद पेचीदा टैक्स का गणित भी जुड़ा हुआ है। इस वित्तीय पहलू पर हर सरकारी कर्मचारी को गंभीरता से ध्यान देना होगा। पिछले दो वर्षों का बकाया वेतन एक साथ मिलने की वजह से कर्मचारियों का पूरा टैक्स असेसमेंट प्रभावित हो सकता है।
जानिए कर्मचारियों को क्यों मिल सकता है 24 महीने का भारी-भरकम एरियर
चालू वित्तीय वर्ष की नियमित आय में जब एरियर की मोटी रकम को जोड़ा जाएगा, तो कर्मचारियों की कुल सालाना आय अचानक बढ़ जाएगी। इसके परिणामस्वरूप कई कर्मचारी सीधे ऊंचे टैक्स स्लैब के दायरे में आ जाएंगे। इससे उन पर उस विशेष वर्ष में टैक्स का भारी बोझ पड़ेगा।
आठवें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। सरकार अभी इन सिफारिशों पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इसे पूरी तरह जमीन पर लागू करने में 2027 तक का समय लग सकता है।
लागू होने की मूल तारीख और अमल में आने के समय के बीच करीब 20 से 24 महीने का लंबा अंतर आ रहा है। इसी वजह से नई सैलरी लागू होने पर कर्मचारियों को पिछले दो साल का एरियर एक साथ मिलेगा। यह बड़ी रकम मिलने से कर्मचारियों की आय में भारी उछाल आएगा।
टैक्स के भारी बोझ से बचाएगी इनकम टैक्स एक्ट की धारा 89(1)
इनकम टैक्स के कड़े नियमों के मुताबिक एरियर की रकम उसी साल टैक्स योग्य होती है जिस साल वह कर्मचारियों को प्राप्त होती है। बड़ी एकमुश्त रकम मिलने से कर्मचारी ऊंचे टैक्स स्लैब में पहुंच जाते हैं। इस संकट से बचाने के लिए टैक्स कानून में सेक्शन 89(1) की व्यवस्था है।
यह खास सेक्शन देश के मध्यमवर्गीय टैक्सपेयर्स को बहुत बड़ी राहत देता है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए अधिक टैक्स न चुकाना पड़े क्योंकि उसे पिछले कुछ सालों का रुका हुआ पैसा अचानक एक साथ मिला है।
इस तरह करें टैक्स राहत की सटीक गणना और भरें फॉर्म 10E
इसके तहत टैक्स की गणना पिछले सालों के वेतन के आधार पर की जाती है। इससे कर्मचारी पर अचानक आने वाला टैक्स का वित्तीय बोझ काफी कम हो जाता है। सेक्शन 89(1) के तहत टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए कर्मचारियों को एक खास प्रक्रिया अपनानी होती है।
सबसे पहले कर्मचारी को उस वित्तीय वर्ष का टैक्स निकालना होता है जिसमें उसे एरियर मिला है। इसमें एरियर की रकम को जोड़कर और फिर एरियर की रकम को घटाकर टैक्स की गणना की जाती है। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच टैक्स के अंतर को नोट किया जाता है।
इसके बाद ठीक यही प्रक्रिया उस पुराने वित्तीय वर्ष के लिए अपनाई जाती है जिससे वह एरियर वास्तव में जुड़ा हुआ है। वहां भी एरियर जोड़कर और घटाकर टैक्स का अंतर देखा जाता है। अगर चालू वर्ष का टैक्स अंतर पुराने वर्ष से ज्यादा बैठता है, तो राहत का दावा कर सकते हैं।
इस पूरी टैक्स राहत को पाने के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले ऑनलाइन फॉर्म 10E भरना अनिवार्य होता है। इस फॉर्म को ऑनलाइन भरे बिना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सेक्शन 89(1) के तहत टैक्स छूट के दावे को स्वीकार नहीं करता है।
Reported By: Rajesh Kumar


