ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप को लगा बड़ा झटका, खुफिया चीफ तुलसी गबार्ड ने अचानक दिया अपने पद से इस्तीफा

Washington News: अमेरिका में ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका लगा है। नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही गबार्ड इस अहम पद पर थीं। वह अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से संभाल रही थीं।

गबार्ड ने अपने इस्तीफे का कारण पति की गंभीर बीमारी को बताया है। उनके पति अब्राहम विलियम्स को हाल ही में एक दुर्लभ प्रकार के हड्डी के कैंसर का पता चला है। उन्होंने कहा कि वह इस कठिन समय में अपने परिवार और पति के साथ पूरा समय बिताना चाहती हैं।

तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा की है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी सेवाओं की तारीफ करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि गबार्ड ने शानदार काम किया और वह अपने पति के स्वास्थ्य की लड़ाई में साथ हैं।

इस्तीफे के बाद अमेरिकी राजनीति में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस ने गबार्ड को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया था। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इससे अमेरिका की अंदरूनी राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है।

ईरान हमले के बाद ट्रंप और गबार्ड में भारी मतभेद

बताया जा रहा है कि ईरान पर अमेरिकी हमले के फैसले को लेकर दोनों के बीच गहरे मतभेद उत्पन्न हो गए थे। ट्रंप प्रशासन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर बिल्कुल अलग-अलग राय थी। अब ट्रंप प्रशासन ने आरोन लुकास को अंतरिम नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी दी है।

मार्च में हुई एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान गबार्ड ने ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर बेहद सावधानी से बयान दिया था। उन्होंने ट्रंप के फैसले का खुलकर समर्थन करने से बचते हुए पूरी तरह संतुलित प्रतिक्रिया दी थी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पूछे गए तीखे सवालों का सीधा जवाब देने से वह बचीं।

ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर गबार्ड का ट्रंप से अलग रुख

सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी में दिए गए बयान में गबार्ड का रुख बिल्कुल अलग था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अमेरिकी हमले ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह बयान ट्रंप की उस दलील के खिलाफ था जिसमें वह ईरान को एक बहुत बड़ा खतरा बताते रहे हैं।

तुलसी गबार्ड से पहले मार्च महीने में राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी केंद्र के निदेशक जो केंट ने भी अपना पद छोड़ा था। केंट ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वह अच्छे विश्वास के साथ इस युद्ध का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं। इस इस्तीफे ने भी काफी सुर्ख़ियां बटोरी थीं।

अमेरिकी मीडिया में इन दिनों यह चर्चा काफी तेज है कि ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान नीति को लेकर गंभीर मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं। तुलसी गबार्ड के इस्तीफे ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की ईरान नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका पर हैं।

ट्रंप प्रशासन आने वाले समय में अपनी विदेश रणनीति को किस दिशा में ले जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। आरोन लुकास फिलहाल पूरी तरह से अस्थायी रूप से अपना काम करेंगे। नए स्थायी निदेशक की नियुक्ति से ही अमेरिका की भविष्य की सुरक्षा नीतियों का असली खुलासा हो पाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी संसद और रक्षा विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है खुफिया एजेंसी के प्रमुख का पद छोड़ना एक बेहद गंभीर विषय है। इसका प्रभाव दूरगामी हो सकता है।

अब व्हाइट हाउस को जल्द ही एक ऐसा स्थायी खुफिया प्रमुख खोजना होगा जो राष्ट्रपति की नीतियों के साथ कदम मिलाकर चल सके। अगले कुछ हफ्तों में ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम ही तय करेंगे कि अमेरिका अपने वैश्विक दुश्मनों से निपटने के लिए कितना तैयार है।

Author: Pallavi Sharma

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