ईरान से युद्ध के खिलाफ अमेरिकी सीनेट का बड़ा कदम, अपनों के ही विद्रोह से बैकफुट पर आए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप!

America News: अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए एक ऐतिहासिक विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ बिना मंजूरी के युद्ध शुरू करने से रोकना है।

सदन में हुई इस महत्वपूर्ण वोटिंग के दौरान बड़ी संख्या में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने अपनी ही सरकार के राष्ट्रपति की इच्छा के खिलाफ जाकर ऐतिहासिक मतदान किया। विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर सत्तारूढ़ दल के बागियों ने इस शांति विधेयक के पक्ष में खुलकर वोट दिया।

प्राइमरी चुनाव में मिली हार के बाद बदला सीनेटर का मूड

यह महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सीनेट में तब देखने को मिला जब रिपब्लिकन पार्टी के लुइसियाना से सीनेटर बिल कैसिडी ने अंतिम समय में पाला बदल लिया। कैसिडी हाल ही में हुए प्राइमरी चुनाव में ट्रंप समर्थित उम्मीदवार से अपनी सीट हार चुके थे।

बिल कैसिडी के इस निर्णायक और चौंकाने वाले रुख के कारण यह विवादित विधेयक सीनेट में 47 के मुकाबले 50 मतों से आसानी से पारित हो गया। कैसिडी ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाते हुए जीवन में पहली बार किसी ऐसे युद्ध विरोधी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है।

केंटुकी से विद्रोही रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, मेन की सुसैन कॉलिन्स और अलास्का की लिसा मर्कोव्स्की ने भी हमेशा की तरह इस बार भी ट्रंप नीति के खिलाफ जाकर वोट डाला। इन सांसदों के रुख से साफ है कि ट्रंप को अब अपनी पार्टी के अंदर भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।

सैनिकों की वापसी या संसद की लेनी होगी लिखित मंजूरी

फरवरी के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर हमला करने का विवादित सैन्य आदेश जारी करने के बाद से डेमोक्रेट सांसद लगातार इस युद्ध अधिकार प्रस्ताव पर वोटिंग कराने की मांग कर रहे थे। इस कानून के तहत ट्रंप को अब हर सैन्य कार्रवाई के लिए संसद से मंजूरी लेनी होगी।

यदि संसद इस पर अपनी लिखित सहमति नहीं देती है, तो अमेरिकी सेना को ईरान से अपने तमाम सैनिकों को हर हाल में वापस बुलाना ही होगा। हालांकि इस कानून को अंतिम रूप से लागू करने के लिए सीनेट में एक और अंतिम दौर का मतदान होना अभी बाकी है।

इसी बीच भारत के घरेलू मोर्चे पर भी कुछ बड़ी व्यापारिक और सामाजिक हलचलें देखी गई हैं। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों ने बाजार से 12,400 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा कमाया है, वहीं पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने महिलाओं के विकास के लिए ‘अन्नपूर्णा’ योजना को मंजूरी दे दी है।

Author: Pallavi Sharma

- Advertisement -

Hot this week

Related Articles

Popular Categories