ईरान युद्ध के बीच डोनाल़्ड ट्रंप और शी चिनफिंग की महाबैठक की नई तारीख तय, क्या टल जाएगा विश्व युद्ध का खतरा?

Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित शिखर वार्ता की नई तारीखों का ऐलान हो गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप 14 और 15 मई को चीन की यात्रा करेंगे। पहले यह यात्रा मार्च के अंत में प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मुलाकात मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने में मददगार साबित होगी।

व्हाइट हाउस ने दी आधिकारिक जानकारी

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे की पुष्टि की। लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप इस साल वॉशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी पेंग लीयुआन की मेजबानी भी करेंगे। ट्रंप ने हाल ही में आयरलैंड की प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन के साथ ओवल ऑफिस में हुई बैठक के दौरान भी इस कार्यक्रम में बदलाव के संकेत दिए थे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चीन को इस पुनर्निर्धारित कार्यक्रम से कोई आपत्ति नहीं है और दोनों नेता मिलने के लिए उत्सुक हैं।

ईरान युद्ध के कारण टली थी यात्रा

ट्रंप की इस यात्रा में देरी का मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा युद्ध है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई। प्रेस सचिव लेविट से जब पूछा गया कि क्या युद्ध समाप्ति की शर्त पर बैठक दोबारा तय हुई है, तो उन्होंने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी मौजूदा वैश्विक हालातों को समझते हैं और उन्होंने ट्रंप की उपस्थिति की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए देरी पर सहमति जताई है।

शांति की उम्मीद और भविष्य का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस बैठक को वैश्विक शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। व्हाइट हाउस ने अनुमान जताया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष अगले चार से छह सप्ताह के भीतर किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकता है। इससे पहले ट्रंप और शी की मुलाकात पिछले साल अक्टूबर में दक्षिण कोरिया के बुसान में ‘एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग’ (APEC) सम्मेलन के दौरान हुई थी। अब मई में होने वाली यह द्विपक्षीय वार्ता न केवल व्यापारिक रिश्तों बल्कि वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को भी नई दिशा दे सकती है।

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