मानसून की दस्तक से पहले डेंगू का बढ़ा बड़ा खतरा, प्रशासन ने बुलाई आपात बैठक और जारी किया सख्त अल्टीमेटम

Uttarakhand News: उत्तराखंड में मानसून के आगमन से पहले स्वास्थ्य विभाग डेंगू और जलजनित बीमारियों को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। रविवार को देहरादून के जिला अधिकारी सविन बंसल ने आपात बैठक बुलाकर संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।

जिला अधिकारी ने सभी अस्पतालों को पूरी तरह चाक-चौबंद रहने का सख्त अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेंगू से निपटने की तैयारियों में किसी भी स्तर पर थोड़ी सी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन हर संदिग्ध मामले पर नजर रख रहा है।

अस्पतालों में रैपिड टेस्ट और एलाइजा किट होगी उपलब्ध

डीएम ने निर्देश दिया कि मरीजों के सही इलाज के लिए सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में रैपिड टेस्ट और डेंगू एलाइजा टेस्ट की पुख्ता व्यवस्था हो। अस्पतालों में आवश्यक उपकरण, जीवन रक्षक दवाइयां, ब्लड बैंक और बेड की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एलाइजा टेस्टिंग किट पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहेगी। जिला प्रशासन आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग को तुरंत अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराएगा। डेंगू जांच के लिए सभी निजी लैब की अधिकतम दरें भी जल्द निर्धारित की जाएंगी।

आशा कार्यकर्ताओं को मिली डोर-टू-डोर सर्वे की बड़ी जिम्मेदारी

देहरादून और ऋषिकेश के शहरी क्षेत्रों में तैनात 1,443 आशा कार्यकर्ताओं को वार्ड के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ये टीमें नियमित रूप से डोर-टू-डोर सर्वे करेंगी। इसके साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करके माइक्रो प्लान के तहत काम शुरू होगा।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। बेहतर काम करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को एनएचएम, नगर निगम और जिला प्रशासन की तरफ से कुल ₹4,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

स्कूलों में बच्चों के लिए फुल बाजू की ड्रेस अनिवार्य

प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी रोगों की रोकथाम के लिए सभी स्कूलों को नई एडवाइजरी जारी की है। अब बच्चों के लिए फुल बाजू की ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा। नगर निगम के कूड़ा वाहनों के माध्यम से जागरूकता संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

डीएम ने नगर निगम को रिस्पना और बिंदाल नदी तटों सहित शहर के सभी नालों की सफाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। डेंगू हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लार्विसाइड टैंकरों से नियमित रासायनिक छिड़काव करके मच्छरों के खतरनाक लार्वा को तुरंत नष्ट किया जाएगा।

गंदगी और जलभराव मिलने पर कटेगा भारी चालान

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जलभराव रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी संस्थान में गंदगी या डेंगू का लार्वा पाए जाने पर संबंधित मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और मौके पर ही भारी चालान काटा जाएगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023 में डेंगू के 1,201 मामले और 13 मौतें दर्ज हुई थीं। वहीं साल 2024 में 37 और 2025 में 785 मामले आए। साल 2026 में अब तक केवल 5 स्थानीय मामले सामने आए हैं, जिनकी निगरानी जारी है।

Author: Harish Rawat

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