Lucknow News: राजधानी लखनऊ स्थित पुराने हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं का आंदोलन आज भी जारी है। नगर निगम द्वारा वकीलों के चैंबर तोड़े जाने और पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों ने काम ठप कर दिया है। इस हड़ताल के कारण न्यायिक कार्यों पर बड़ा असर पड़ा है और वादकारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यह विवाद रविवार को तब शुरू हुआ, जब नगर निगम की टीम ने कचहरी के पास बने कई चैंबरों को अवैध बताते हुए ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई का विरोध करने पर वकीलों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। इसी घटना के बाद वकीलों ने आंदोलन की राह पकड़ ली है।
अधिवक्ताओं की क्या है प्रमुख मांगें?
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी हड़ताल 26 मई तक जारी रहेगी। वकीलों की मुख्य मांग है कि लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, वजीरगंज और कैसरबाग थानों में प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाए।
वकीलों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी उचित नोटिस के उनके चैंबर तोड़े, जो कि सरासर गलत है। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। न्यायिक कार्यों के बाधित रहने से लंबित मुकदमों की सुनवाई पर भी असर पड़ रहा है और मामले सुलझने के आसार फिलहाल कम दिख रहे हैं।
26 मई को होगी अगली बैठक
कोर्ट परिसर में सन्नाटा पसरा है क्योंकि वकील किसी भी न्यायिक कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। अधिवक्ताओं ने आगामी 26 मई को फिर से एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इसी बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने या इसे खत्म करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। तब तक कोर्ट आने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
प्रशासन की ओर से इस बीच कोई बड़ा समाधान नहीं निकला है, जिससे वकीलों में आक्रोश बना हुआ है। हड़ताल के चलते जमानत, सुनवाई और नई फाइलिंग जैसे जरूरी काम भी ठप पड़ गए हैं। स्थिति सामान्य करने के लिए बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि कोर्ट का काम जल्द से जल्द दोबारा शुरू हो सके।
Author: Ajay Mishra


