Uttar Pradesh News: कौशाम्बी जिले में शराबी वाहन चालक पुलिस और परिवहन विभाग के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गए हैं। क्षेत्र के लोग हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये की शराब गटक रहे हैं। इसके बावजूद सड़कों पर चेकिंग के दौरान वे पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहे हैं।
मशीन देखते ही सांस रोक लेते हैं शातिर चालक
नशेड़ी चालकों के न पकड़े जाने के पीछे एक बेहद हैरान करने वाली वजह सामने आई है। जैसे ही पुलिसकर्मी उनके मुंह में ब्रेथ एनालाइजर लगाते हैं, शातिर चालक अपनी सांस रोक लेते हैं। इस चालाकी के कारण मशीन उनके शरीर में अल्कोहल की सही मात्रा दर्ज नहीं कर पाती है।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 16 महीनों के बड़े अभियानों के बावजूद सिर्फ 44 चालकों का चालान हो सका है। यातायात पुलिस के सूत्रों के अनुसार उनके स्तर से 10 हजार रुपये का चालान कटता है। वहीं एआरटीओ विभाग इस लापरवाही पर तीन हजार रुपये का जुर्माना वसूल करता है।
यातायात विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि मशीन पांच से सात सेकेंड में अल्कोहल की मात्रा बता देती है। इसके लिए चालक को तेजी से फूंक मारनी होती है। मगर यहां के शातिर लोग जांच के दौरान दो से तीन मिनट तक अपनी सांस रोककर मशीन को छका देते हैं।
हाईवे और फोरलेन पर बढ़ रहा हादसों का खतरा
कौशाम्बी जिले से करीब 64 किलोमीटर का नेशनल हाईवे गुजरता है। इसके अलावा महेवाघाट से संदीपन घाट तक रामवन गमन पथ और प्रयागराज तक फोरलेन मार्ग है। बालू खनन का बड़ा केंद्र होने के कारण यहां भारी वाहनों का परिवहन बहुत ज्यादा रहता है। ऐसे में यह लापरवाही जानलेवा बनती है।
सड़कों पर वाहन चालकों की थोड़ी सी लापरवाही भी आए दिन बेगुनाह लोगों की मौत का कारण बनती है। इन भीषण सड़क हादसों में सबसे बड़ा कारण चालकों का नशा करके गाड़ी चलाना पाया गया है। आबकारी अधिकारी राजेश कुमार के मुताबिक जिले में शराब की कुल 161 दुकानें संचालित हैं।
नशेड़ी चालक अक्सर रात के वक्त निकलते हैं, जिससे पुलिस की रूटीन चेकिंग प्रभावित होती है। हालांकि संयुक्त टीम अब इस नई चुनौती से निपटने के लिए रणनीति बदल रही है। पुलिस अब रात के वक्त विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध वाहनों की गहनता से जांच सुनिश्चित कर रही है।
Author: Ajay Mishra

