Lucknow News: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती पर हाहाकार मचा है। उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए योगी सरकार ने बेहद सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने बिजली व्यवस्था में बड़ी लापरवाही बरतने के आरोप में दो वरिष्ठ अधिशासी अभियंताओं को तुरंत निलंबित कर दिया है।
गाजियाबाद और मेरठ के इंजीनियरों पर गिरी गाज
लापरवाही के मामले में गाजियाबाद के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राहुल और मेरठ के योगेश कुमार को सस्पेंड किया गया है। दोनों अधिकारियों पर बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी और शिकायतों की अनदेखी का आरोप है। अत्यधिक तापमान के कारण ट्रांसफार्मरों पर दबाव बढ़ा है, जिससे जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
बिजली संकट को लेकर छिड़ा सियासी घमासान
उत्तर प्रदेश का यह बिजली संकट अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार की उत्पादन योजनाओं पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिजली के दाम और मांग लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार पर्याप्त आपूर्ति देने में पूरी तरह नाकाम रही है।
विपक्ष ने सरकार से मांगा श्वेत पत्र
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार साल 2017 से अब तक के बिजली उत्पादन का श्वेत पत्र जारी करे। उन्होंने पूछा कि पिछले नौ सालों के भाजपा शासन में कितनी नई बिजली क्षमता जोड़ी गई है।
ऊर्जा मंत्री शर्मा का विपक्ष पर पलटवार
इन तीखे आरोपों पर ऊर्जा मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य में बिजली की मांग अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। सपा शासन में मांग केवल 13,000 मेगावाट थी, जो आज बढ़कर 30,000 मेगावाट पार कर चुकी है। उन्होंने साफ किया कि कटौती केवल स्थानीय तकनीकी खराबी के कारण हो रही है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फॉल्ट को ठीक करने में हो रही देरी से उपभोक्ताओं की मुसीबतें दोगुनी हो गई हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पारेषण तंत्र पर बढ़ते लोड की गहन जांच की जा रही है।
Author: Ajay Mishra

