Patna News: देश की अर्थव्यवस्था में बिहार का योगदान लगातार तीन प्रतिशत से नीचे बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, बिहार की जीडीपी में हिस्सेदारी मात्र 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख राज्य मिलकर देश की कुल जीडीपी में 48 प्रतिशत का बड़ा योगदान दे रहे हैं।
आय में भारी अंतर और क्षेत्रीय असमानता
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की आर्थिक वृद्धि दर संतोषजनक होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर राज्य काफी पीछे है। बिहार की प्रति व्यक्ति आय लगभग 69 हजार रुपये है, जबकि गोवा और सिक्किम जैसे राज्यों के नागरिक बिहार की तुलना में आठ गुना अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति आय 2.58 लाख रुपये है, जिससे देश में मौजूद क्षेत्रीय आर्थिक असमानता स्पष्ट होती है।
बिहार की जीएसडीपी में बढ़ोतरी का मुख्य आधार फिलहाल निर्माण कार्य और सरकारी खर्च बना हुआ है। हालांकि, राज्य की अर्थव्यवस्था अब भी बड़े पैमाने पर पारंपरिक कृषि पर निर्भर है। औद्योगीकरण की धीमी रफ्तार के कारण आर्थिक विकास का प्रत्यक्ष लाभ आम जनता की आय में उस अनुपात में दिखाई नहीं दे रहा है, जिसकी अपेक्षा की जाती है।
निवेश और औद्योगिक विकास की राह में चुनौतियां
निवेश के मामले में भी बिहार को अभी लंबा रास्ता तय करना है। वित्त वर्ष 2025 में देश में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 83 प्रतिशत हिस्सा केवल पांच राज्यों तक सीमित रहा, जबकि बिहार को एक प्रतिशत का आधा हिस्सा भी नहीं मिल सका। स्पष्ट है कि बड़े निवेशक अब भी राज्य की तुलना में अधिक औद्योगिक आधार वाले राज्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, बिहार तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में शामिल है। राज्य की विकास दर 13 प्रतिशत से अधिक रही है, जो कई बड़े राज्यों की तुलना में बेहतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार किया जाए और औद्योगिक नीतियों में सुधार हो, तो बिहार भविष्य में देश की एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर सकता है।
आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी उपाय
बिहार को अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए कई स्तरों पर काम करना होगा। राज्य के लिए सुझावों में प्रमुख रूप से औद्योगीकरण और शहरीकरण को गति देना, निवेश के लिए प्रोत्साहन नीतियां लागू करना और कृषि का आधुनिकीकरण करना शामिल है। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और आधारभूत संरचनाओं का विकास करना अनिवार्य है।
इसके अतिरिक्त, राज्य को स्वरोजगार को बढ़ावा देने, जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए ठोस उपाय करने की आवश्यकता है। इन सुधारों के साथ, बिहार अपनी ‘सुधार के अवसर वाले राज्य’ की श्रेणी से ऊपर उठकर एक उच्च क्षमता वाले राज्य के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।
Author: Amit Yadav


