West Bengal News: कच्चे पटसन की भारी कमी और बढ़ती कीमतों के कारण पश्चिम बंगाल का जूट उद्योग बड़े संकट में फंस गया है। राज्य की कई जूट मिलें बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। मिल मालिकों ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन के अनुसार हुगली औद्योगिक क्षेत्र की कम से कम 14 मिलों ने कच्चे माल की कमी के कारण अपना काम पूरी तरह रोक दिया है। आसमान छूती लागत की वजह से अब मिलों को चलाना आर्थिक रूप से बिल्कुल नामुमकिन हो गया है, जिससे उत्पादन ठप है।
लाखों श्रमिकों की आजीविका पर मंडराया बड़ा संकट
एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन ने बताया कि जूट बेलर्स एसोसिएशन की दर 17,100 रुपये प्रति क्विंटल पर रुकी हुई है। नया स्टॉक बाजार में आने में अभी ढाई महीने का समय बाकी है। इस गंभीर संकट के कारण मिल मालिकों को बिना कच्चे माल के ही काम का संचालन करना पड़ रहा है।
इस संकट के कारण उत्तर 24 परगना और हुगली के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 75,000 मजदूर पहले ही बेरोजगार हो चुके हैं। जूट उद्योग में कुल दो लाख कर्मचारी काम करते हैं। मिल मालिकों को उम्मीद है कि नई सरकार आपातकालीन आयात और आपातकालीन फंड जारी करके राहत प्रदान करेगी।
गलत नीतियों और जमाखोरी ने बिगाड़ा बाजार का खेल
केंद्रीय वस्त्र सचिव को भेजे ज्ञापन में संघ ने स्पष्ट कहा है कि पिछले चार महीनों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। बाजार में किसी आधिकारिक मानक दर के न होने से पूरी व्यवस्था अनिश्चित हो गई है। जमाखोरों ने पहले ही ऊंचे दामों पर फसल का बड़ा हिस्सा दबा लिया है।
बाजार में केवल दो से तीन लाख गांठें ही बची हैं। अधिकारियों का कहना है कि शून्य-भंडार आदेश दोधारी तलवार साबित हो रहा है। इसके कड़े नियमों के कारण आपूर्तिकर्ता बुरी तरह फंस गए हैं और मिल मालिकों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है, जिससे नुकसान बढ़ा है।
डबल इंजन सरकार से जूट उद्योग को बड़ी उम्मीदें
जूट मिल मालिकों ने बताया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने सत्ता परिवर्तन के लिए वोट दिया है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इस राजनीतिक बदलाव का सकारात्मक असर मई महीने के अंत तक जमीन पर दिखेगा। जमाखोरी रुकने से मिलों को सही दाम पर जूट मिल सकेगा।
उद्योगपति संजय कजारिया ने कहा कि पटसन क्षेत्र राज्य की नई भाजपा सरकार का खुले दिल से स्वागत करता है। हम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। डबल इंजन की सरकार से हमें टकराव के बजाय एक संवेदनशील और स्थिर नीति की उम्मीद है।
Author: Sourav Banerjee


