शादी या नौकरी की भर्ती? 1.6 करोड़ कमाने वाले आईआईटी-आईआईएम ग्रेजुएट की अनोखी शर्त पर छिड़ी बहस

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Social Media Trend: आज के आधुनिक दौर में जीवनसाथी का चुनाव करते समय सैलरी, शैक्षणिक डिग्री या आपसी वैचारिक तालमेल में से किसे अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हुई एक हालिया पोस्ट ने इस गंभीर विषय पर इंटरनेट जगत में एक नई और तीखी बहस पूरी तरह छेड़ दी है।

हार्वर्ड से साइकोलॉजी में पीएचडी करने वाले कबीर मेनन ने एक्स पर अपने एक बेहद सफल दोस्त की वास्तविक कहानी साझा की है। उनका 34 वर्षीय दोस्त आईआईटी बॉम्बे और आईआईएम अहमदाबाद से ग्रेजुएट है, जो ‘बिग फोर’ कंसल्टिंग फर्म में कार्यरत है और उसका सालाना पैकेज लगभग 1.6 करोड़ रुपये है।

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मैट्रीमोनी प्रोफाइल पर शर्तों ने किया हैरान

मेनन के दोस्त ने हाल ही में शादी के लिए एक प्रसिद्ध मैट्रीमोनी वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल बनाया, जहां उसे बहुत कम समय में सैकड़ों महिलाओं से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। हालांकि, उससे संपर्क करने वाली अधिकांश कामकाजी महिलाओं की सालाना आय 6 लाख से 15 लाख रुपये के बीच दर्ज की गई थी।

जब उस युवक ने कुछ महिलाओं से सीधे बात की, तो उसे पता चला कि ये सभी महिलाएं भविष्य में बच्चे के जन्म के बाद भी अपने करियर और जॉब को निरंतर जारी रखना चाहती हैं। बस इसी एक मुख्य बिंदु ने उस अत्यधिक कमाऊ युवक को शादी के नियमों पर गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया।

कमाई और बच्चों की परवरिश का गणित

युवक का मानना है कि यदि दोनों पार्टनर लगभग बराबर कमाते हैं, तो वे घरेलू खर्चों को बराबर बांटकर आसानी से रह सकते हैं। वह स्वयं ‘स्टे-एट-होम फादर’ बनने को भी तैयार है, बशर्ते उसकी पत्नी पूरे परिवार का खर्च उठाने लायक पर्याप्त कमाती हो और उसे घर संभालने की पूरी छूट मिले।

उसे उस स्थिति से भी कोई आपत्ति नहीं है जहां पत्नी पूरी तरह गृहणी बनकर बच्चों की परवरिश करे, क्योंकि उसकी अपनी कमाई घर चलाने के लिए पर्याप्त है। उसे केवल उस व्यवस्था से सख्त ऐतराज है, जहां पत्नी की आय बहुत कम हो और वह मां बनने के बाद भी अनिवार्य रूप से जॉब करना चाहे।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल

इस पोस्ट के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स ने युवक की इस सोच पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि महिलाओं के लिए नौकरी केवल पैसा नहीं, बल्कि उनका आत्मसम्मान और व्यक्तिगत आजादी है। वे हर छोटी जरूरत के लिए अपने पति के सामने हाथ फैलाना बिल्कुल पसंद नहीं करतीं।

अन्य यूजर्स ने इस पूरे नजरिए की आलोचना करते हुए कहा कि शादी को एक्सेल शीट की तरह देखना और इसे केवल आय के दायरे तक सीमित कर देना पूरी तरह गलत है। यह जीवनसाथी तलाशने के बजाय किसी कंपनी में कर्मचारियों की भर्ती करने जैसा व्यावसायिक और पूरी तरह से भावनाहीन प्रतीत होता है।

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