Delhi News: महान नीतिशास्त्र और कूटनीति के ज्ञाता आचार्य चाणक्य ने इंसानी जीवन को सुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण नियम बताए हैं। चाणक्य नीति ग्रंथ में लिखी बातें आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक मानी जाती हैं। उन्होंने जीवन के गहरे अनुभवों से व्यक्ति के गुण-दोष समझाए हैं।
आचार्य चाणक्य ने अपने एक बेहद प्रसिद्ध श्लोक के माध्यम से समाज को सचेत करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया है कि किस तरह के राजा, स्त्री और पेड़ बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाते हैं। इन परिस्थितियों में विनाश पूरी तरह तय माना जाता है।
चाणक्य जी ने अपने श्लोक ‘नदीतीरे च ये वृक्षाः परगेहेषु कामिनी। मन्त्रिहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम्॥’ के जरिए जीवन का एक कड़वा सच उजागर किया है। इसका सीधा अर्थ है कि गलत स्थान और गलत संगति का परिणाम हमेशा विनाशकारी ही होता है।
इस श्लोक के अनुसार, जो वृक्ष बिल्कुल नदी या किसी जलाशय के किनारे उगते हैं, उनका जीवन हमेशा खतरे में रहता है। बाढ़, तेज लहरों या भयंकर तूफान के समय नदियां अपने किनारे के पेड़ों को सबसे पहले उखाड़ फेंकती हैं और नष्ट कर देती हैं।
बिना अच्छे सलाहकार के राजा और साम्राज्य का पतन निश्चित
आचार्य चाणक्य का मानना है कि जिस राज्य के राजा के पास कोई योग्य मंत्री या सच्चा मार्गदर्शक नहीं होता, वह साम्राज्य बहुत जल्द बिखर जाता है। बिना कुशल सलाहकारों के कोई भी शासक अपनी प्रजा की रक्षा और राज्य का संचालन लंबे समय तक नहीं कर सकता है।
इसी तरह जो स्त्री हमेशा दूसरों या पराए घर में निवास करती है, उसका स्वाभिमान और सामाजिक सम्मान सुरक्षित रहना मुश्किल हो जाता है। चाणक्य के अनुसार, समाज ऐसी महिलाओं पर बहुत जल्दी उंगली उठा देता है, जिससे उनके चरित्र और जीवन पर संकट आ जाता है।
हालांकि वर्तमान आधुनिक समय में महिलाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर और कामकाजी हो चुकी हैं। आज के प्रोग्रेसिव समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर समान अधिकार मिले हुए हैं। इस वजह से पराए घर में रहने को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच अब धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो रही है।

