जानिए क्यों जंगली बिल्ली के मल से बनती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, 10 हजार तक है कीमत

International News: दुनिया भर के कॉफी प्रेमियों के बीच ‘कोपी लुवाक’ या ‘सिवेट कॉफी’ अपनी अनोखी उत्पादन प्रक्रिया के कारण हमेशा चर्चा में रहती है। पाम सिवेट नामक एक जंगली जानवर के मल से तैयार होने वाली यह दुर्लभ कॉफी दुनिया की सबसे महंगी ड्रिंक मानी जाती है, जिसके एक कप की कीमत भारतीय बाजार में लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक होती है।

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दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाने वाला पाम सिवेट एक निशाचर स्तनधारी जीव है। जंगलों में कॉफी की खेती शुरू होने के बाद, इस जीव ने भोजन के रूप में बेहतरीन कॉफी चेरी को चुनना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह पकी हुई चेरी इसका सबसे पसंदीदा प्राकृतिक भोजन बन गई, जिससे इस ऐतिहासिक कॉफी का जन्म हुआ।

पाचन तंत्र से गुजरकर बदल जाता है स्वाद

यह अनोखा जानवर केवल सबसे अच्छी, मीठी और पूरी तरह पकी हुई कॉफी चेरी का ही चयन करता है। सिवेट के पाचन तंत्र में चेरी का बाहरी गूदा तो आसानी से पच जाता है, लेकिन उसके भीतर मौजूद कॉफी का कठोर बीज पूरी तरह अपरिवर्तित रहता है। यह सुरक्षित बीज अंततः सिवेट के मल के साथ शरीर से बाहर उत्सर्जित हो जाता है।

कई दशक पहले, इंडोनेशिया के कॉफी बागानों में काम करने वाले स्थानीय श्रमिकों ने मल में मौजूद इन सुरक्षित बीजों को इकट्ठा करना शुरू किया। इन बीजों को बेहद सावधानी से गर्म पानी से साफ किया जाता है, धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है और फिर उच्च तापमान पर भूनकर (Roast) यह स्पेशल कॉफी पाउडर तैयार किया जाता है।

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अनोखा स्वाद और कड़वाहट मुक्त सुगंध

वैज्ञानिक दृष्टि से जब कॉफी का बीज सिवेट के पेट से गुजरता है, तो वहां मौजूद प्राकृतिक पाचक एंजाइम और एसिड बीज के भीतर के कड़वे प्रोटीन को पूरी तरह तोड़ देते हैं। रासायनिक प्रक्रिया के कारण इस कॉफी की प्राकृतिक कड़वाहट लगभग समाप्त हो जाती है और इसका स्वाद अविश्वसनीय रूप से स्मूद, रिच और अत्यधिक सुगंधित हो जाता है।

हालांकि, वैश्विक बाजार में इस महंगी कॉफी की भारी मांग के कारण अब पाम सिवेट प्रजाति पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। अधिक मुनाफे के लालच में कई अनधिकृत कारोबारी इन जंगली जानवरों को पकड़कर तंग पिंजरों में बंद कर रहे हैं। उन्हें केवल कॉफी चेरी खाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसका विभिन्न पशु अधिकार संगठन लगातार कड़ा विरोध कर रहे हैं।

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