Health News: महिलाओं के शरीर में पीरियड साइकिल का मतलब केवल ब्लीडिंग के 3 या 5 दिन नहीं होते हैं। वास्तव में, मासिक धर्म शुरू होने के पहले दिन से लेकर अगले पीरियड की शुरुआत के बीच की पूरी अवधि को मेंस्ट्रुअल साइकिल कहा जाता है, जो सामान्यतः 28 दिनों की होती है।
इस पूरे 28 दिनों के चक्र के दौरान महिलाओं के शरीर में मुख्य रिप्रोडक्टिव हार्मोन ‘एस्ट्रोजन’ और ‘प्रोजेस्टेरोन’ का स्तर लगातार बदलता रहता है। हार्मोन्स के इसी उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य, मूड और एनर्जी लेवल में व्यापक बदलाव देखने को मिलते हैं, जिन्हें चार प्रमुख चरणों में समझा जा सकता है।
मेंस्ट्रुअल और फॉलिकुलर फेज के शारीरिक लक्षण
चक्र के पहले से पांचवें दिन को मेंस्ट्रुअल फेज कहते हैं। जब प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो यूटेरस की अंदरूनी परत टूटकर ब्लीडिंग के रूप में बाहर निकलती है। इस दौरान दोनों हार्मोन्स का स्तर न्यूनतम होने से महिलाओं को अत्यधिक थकान, चिड़चिड़ापन, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और सिरदर्द की समस्या होती है।
छठे से तेरहवें दिन तक फॉलिकुलर फेज चलता है। इसमें मस्तिष्क से फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) रिलीज होता है, जिससे ओवरी में अंडों का विकास शुरू होता है। इस फेज में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने से महिलाएं खुद को बेहद ऊर्जावान महसूस करती हैं, त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है और ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है।
ओव्यूलेशन और ल्यूटियल फेज में हार्मोनल बदलाव
चौदहवें दिन के आसपास ओव्यूलेशन फेज होता है, जो पूरे साइकिल का सबसे छोटा और महत्वपूर्ण चरण है। इसमें ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) के प्रभाव से ओवरी से अंडा रिलीज होता है। इस समय एस्ट्रोजन अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर होता है, जिससे महिलाएं अधिक सोशल और एनर्जेटिक महसूस करती हैं और व्हाइट डिस्चार्ज गाढ़ा हो जाता है।
अंत में 15वें से 28वें दिन तक ल्यूटियल फेज आता है, जिसमें शरीर खुद को संभावित प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करता है। इस दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेजी से बढ़ता है, जिससे शरीर में सुस्ती आती है। गर्भधारण न होने पर चक्र के अंतिम सप्ताह में दोनों हार्मोन्स का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) शुरू हो जाता है।

