राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक 6 जुलाई को, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर हो सकता है बड़ा फैसला

Ayodhya News: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चंदा और दान चोरी का मामला सामने आया है। इसके बाद आगामी 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। पूरे देश की नजरें इस बड़ी मीटिंग पर टिकी हैं, जहां कई गंभीर संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

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इस हाई-प्रोफाइल बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के भविष्य पर फैसला हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों दिग्गजों ने नैतिकता के आधार पर अपने पदों से इस्तीफे की पेशकश की है। ट्रस्ट की इस आपात बैठक में इन दोनों के पदों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद बना था यह ट्रस्ट

नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद फरवरी 2020 में आधिकारिक तौर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था।

नई दिल्ली में आयोजित पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया था। इसके साथ ही वीएचपी के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष बनाया गया था। पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

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जानिए वर्तमान में कौन-कौन हैं राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य

इस बोर्ड में कुल 10 स्थायी सदस्य होते हैं। अयोध्या के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से एक पद खाली है। अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास अभी अस्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए उनके 6 जुलाई की बैठक में शामिल होने की उम्मीद बहुत कम है।

चंपत राय ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक फैसले लेते हैं। उनके साथ डॉ. अनिल मिश्रा मंदिर के सभी व्यावहारिक मामलों की देखरेख करते हैं। गोविंद गिरि महाराज वित्तीय मामलों को संभालते हैं। इसके अलावा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराज और युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज भी इसके मुख्य स्थायी सदस्य हैं।

निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत महंत दिनेंद्र दास भी इस ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य हैं। हाल ही में दलित नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद आरएसएस कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को शामिल किया गया है। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार केवल स्थायी सदस्यों को ही मतदान करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

स्थायी सदस्यों के बहुमत से ही बदल सकते हैं ट्रस्ट के नियम

ट्रस्ट में शामिल पांच पदेन सदस्यों में केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं। इन अधिकारियों के पास वोट देने का अधिकार नहीं होता है। यह व्यवस्था पूरा नियंत्रण स्थायी सदस्यों को देती है। किसी भी बड़े बदलाव के लिए स्थायी सदस्यों के बहुमत की मंजूरी अनिवार्य होती है।

ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार किसी स्थायी सदस्य को हटाने का कोई सीधा नियम नहीं है। अगर चंपत राय और अनिल मिश्रा पद छोड़ते हैं, तो भी वे सदस्य बने रहेंगे। 6 जुलाई की बैठक का समीकरण काफी उलझ गया है क्योंकि वोटिंग करने वाले सक्रिय सदस्यों की संख्या बहुत कम है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में कुछ विशेष आमंत्रित सदस्य भी भाग लेंगे। इनमें आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैयाजी जोशी और दिनेश चंद्र शामिल हैं। इनके अलावा कर्नाटक के वीएचपी नेता गोपाल नागरकट्टे भी मौजूद रहेंगे, जो जनवरी 2021 से मंदिर के सिविल और निर्माण कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

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