Mumbai News: मुंबई में गैस सिलेंडर की किल्लत का असर अब 150 साल से स्थापित ऐतिहासिक मुंबई डब्बावाला संगठन के कामकाज पर भी पड़ा है। जिन ग्राहकों तक खाना पहुंचाना था, उनमें से कुछ का टिफिन बंद हो गया है। डब्बा पहुंचाने वाले कर्मचारियों की आय भी लगभग आधी हो गई है। चर्चगेट से दादर और बांद्रा तक, जहां पहले सफेद गांधी टोपी पहने डब्बावाले सैकड़ों टिफिन पहुंचाते नजर आते थे, अब कई जगहों पर उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।
गैस संकट से बंद हुए मेस, घटी टिफिन की संख्या
डब्बावालोंने बताया कि घर से बनने वाले कुछ डब्बे तो मिल जाते हैं, लेकिन मेस या छोटे किचन से खाना मंगवाने वाले ग्राहकों के टिफिन बंद हो गए हैं। गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के कारण ये मेस बंद हो गए हैं। डब्बावालों के अनुसार, गैस की कमी की वजह से कई ग्राहक कम हो गए हैं। पहले जहां रोजाना हजारों टिफिन चलते थे, अब उनमें काफी गिरावट आई है। इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ा है।
100 के बजाय 40 लोगों का खाना, कमाई हुई आधी
किचन और महिलाशेफ, जो डब्बावालों को खाना बनाकर देते हैं, उनका भी हाल बेहाल है। टिफिन बनाकर देने वाली कुटुंब सखी ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने से किचन चलाना मुश्किल हो गया है। पहले रोजाना 100 से 125 लोगों का खाना बनाते थे, लेकिन अब सिर्फ 40 लोगों का ही टिफिन दे पा रहे हैं। हल्का नाश्ता उपमा आदि बन रहा है, लेकिन दोपहर तक ही गैस बचती है। कितने लोग डब्बा लेने आए, लेकिन दे ही नहीं पा रहे हैं।
जीविका के लिए संघर्ष, सरकार से मदद की उम्मीद
टिफिन कीसंख्या घटने से डब्बावालों की कमाई लगभग आधी रह गई है। जो सिस्टम अपनी समयबद्धता और सटीकता के लिए दुनिया भर में मशहूर है, वह अब संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। अगर यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में उन्हें अपनी जीविका के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। डब्बावालों ने कहा कि वे राज्य सरकार से मुलाकात करेंगे और इस समस्या का कोई हल निकालने की बात करेंगे। फिलहाल गैस संकट का यह दौर उनके लिए मुश्किल बना हुआ है।


