Delhi News: देश की सर्वोच्च अदालत में बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता को शीर्ष अदालत के जज के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है।
प्रधान न्यायाधीश यानी सीजेआइ सूर्यकांत की अध्यक्षता में हाल ही में इस महत्वपूर्ण विषय पर दो बड़ी बैठकें बुलाई गई थीं। इन बैठकों में गहन चर्चा के बाद पांच नामों पर अंतिम मुहर लगाई गई। केंद्र सरकार भी देश की सबसे बड़ी अदालत में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कोलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है, उनमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू शामिल हैं। इनके अलावा बांबे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा के नाम को भी मंजूरी दी गई है।
इस सूची में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली का नाम भी शामिल है। वहीं, बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील वी. मोहना के नाम की सिफारिश की गई है। वी. मोहना देश में संवैधानिक और दीवानी मामलों की एक बेहद जानी-मानी विशेषज्ञ मानी जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में बढ़ेगा महिला प्रतिनिधित्व
सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान समय में प्रधान न्यायाधीश को मिलाकर कुल बत्तीस न्यायाधीश अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अगले महीने शीर्ष न्यायालय के दो मौजूदा न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वर्तमान में पूरे सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ही एकमात्र महिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।
वरिष्ठ वकील वी. मोहना की सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति से अदालत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ जाएगा। इस फैसले से न्यायपालिका में लैंगिक समानता को एक नया बल मिलेगा। कानूनी मामलों के विशेषज्ञ भी कोलेजियम के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।
हाल ही में केंद्र सरकार ने जजों की स्वीकृत संख्या को ज्योतिषीय रूप से बढ़ाने के लिए एक बड़ा अध्यादेश जारी किया था। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या को वर्तमान चौतीस से बढ़ाकर अड़तीस करने का प्रावधान किया गया है, ताकि मुकदमों का निपटारा जल्द हो सके।
कानून मंत्रालय ने जारी किया था नया अध्यादेश
विधि मंत्रालय ने पिछले दिनों अध्यादेश अधिसूचित किया था, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में जरूरी संशोधन किया गया। इस संशोधन के जरिए ही अदालत की स्वीकृत संख्या में बढ़ोतरी की गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस मसौदा विधेयक को पहले ही मंजूरी दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में इस समय लंबित मामलों की संख्या काफी अधिक है। नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से पीठ को मजबूती मिलेगी और मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। कोलेजियम की इस सिफारिश पर अब केंद्र सरकार अंतिम फैसला लेकर जल्द ही राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजेगी।
Author: Gaurav Malhotra

