हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारी एक्ट बचाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, हाईकोर्ट ने बताया था असंवैधानिक

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों के सेवा लाभ रोकने वाले कर्मचारी एक्ट को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में इस कानून को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया था। अब सरकार ने शिक्षा विभाग को विशेष अनुमति याचिका तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में दायर करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने शिक्षा विभाग के निदेशक को कहा है कि एसएलपी का ड्राफ्ट महाधिवक्ता से मंजूर करवाया जाए। इसके बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगी तो राज्य पर हजारों करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय देनदारी आ सकती है।

हाईकोर्ट ने कानून को बताया था असंवैधानिक

हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 26 अप्रैल 2026 को कर्मचारी एक्ट को रद्द कर दिया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की बेंच ने करीब 450 याचिकाओं का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को तीन माह के भीतर पात्र कर्मचारियों को सभी अनुबंध सेवा लाभ देने का आदेश दिया था।

अदालत ने कहा था कि एक्ट की धारा 3, 5, 6, 7, 8 और 9 सीधे संविधान के खिलाफ थीं। कोर्ट ने माना कि इन धाराओं को हटाने के बाद पूरे कानून का अस्तित्व खत्म हो जाता है। इसी कारण अदालत ने पूरे अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया था।

सेवा लाभ कटौती के आदेश भी रद्द

हाईकोर्ट ने इस कानून के आधार पर किए गए सभी आदेशों को भी अमान्य कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विधानसभा ऐसा कानून नहीं बना सकती, जो न्यायपालिका के आदेशों को पूरी तरह समाप्त कर दे। कोर्ट ने इसे शक्तियों के पृथक्करण और कानून के शासन के खिलाफ बताया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि यह अधिनियम भेदभावपूर्ण था। कोर्ट के अनुसार 12 दिसंबर 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को सेवा लाभों से वंचित किया गया, जबकि उससे पहले नियुक्त कर्मचारियों को समान लाभ मिल रहे थे। अदालत ने इसे समानता के अधिकार के खिलाफ माना था।

ताज मोहम्मद और लेखराम केस बना आधार

इस पूरे विवाद का केंद्र ताज मोहम्मद और लेख राम बनाम हिमाचल प्रदेश मामला रहा। कोर्ट ने दोहराया कि आरएंडपी नियमों के तहत पारदर्शी प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारी नियमित होने के बाद अपनी अनुबंध सेवा के आधार पर वरिष्ठता और अन्य लाभ पाने के हकदार हैं।

राज्य सरकार ने यह नया कानून संभावित वित्तीय बोझ कम करने के लिए लागू किया था। सरकार का अनुमान था कि यदि पुराने फैसलों के अनुसार लाभ दिए गए तो राज्य पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

Author: Sunita Gupta

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