Delhi News: बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता के लिए राहत भरी बड़ी खबर आ रही है। सरकार जल्द ही आपकी रसोई का बजट हल्का करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठा सकती है। केंद्र सरकार एलपीजी सिलेंडर में एक खास सिंथेटिक ईंधन मिलाने का मास्टर प्लान तैयार कर रही है।
इस नए सिंथेटिक ईंधन का नाम डाइमिथाइल ईथर है। ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड’ (BIS) ने एलपीजी के साथ इसके मिश्रण को लेकर नया आधिकारिक स्टैंडर्ड भी जारी कर दिया है। सरकार इस कदम से उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर बड़ी आर्थिक राहत देने का मन बना रही है।
क्रूड ऑयल का झंझट खत्म होने से सिलेंडरों की लागत घटेगी
मौजूदा समय में घरेलू रसोई गैस को कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से तैयार करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते ही देश में एलपीजी की कीमतें तुरंत बढ़ जाती हैं। इस आयात निर्भरता के कारण घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा और भारी असर पड़ता है।
नई मिश्रण नीति देश को वैश्विक तेल संकट के समय बड़ा सुरक्षा कवच देगी। एलपीजी में डाइमिथाइल ईथर मिलाने से गैस की घरेलू उपलब्धता तेजी से बढ़ेगी। इसके साथ ही नए गैस सिलेंडर को तैयार करने की कुल लागत में भी भारी कमी दर्ज की जाएगी।
जानिए क्या है यह नया जादुई सिंथेटिक ईंधन
डाइमिथाइल ईथर एक बेहद आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल साफ-सुथरा सिंथेटिक ईंधन है। ऊर्जा वैज्ञानिकों के अनुसार भविष्य में हमारे घरेलू एलपीजी सिलेंडरों में बहुत आसानी से इसका मिश्रण कर सकते हैं। विशेषज्ञ सिलेंडरों में इसकी मात्रा 10 से 20 प्रतिशत तक रखने की वकालत कर रहे हैं।
भारत सरकार इस पूरी योजना को लेकर बहुत फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है। इस दीर्घकालिक रोडमैप से भविष्य में एलपीजी की संभावित किल्लत को हमेशा के लिए दूर कर देंगे। इससे एलपीजी सिलेंडर की आसमान छूती कीमतों पर भी पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर सरकार को चेताया
जहां सरकार इस नीति को लेकर उत्साहित है, वहीं ऊर्जा विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। देश के जाने-माने ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण राय रखी है। उनके अनुसार यह जादुई तकनीक अभी पूरी तरह अपने शुरुआती चरण में काम कर रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसे सीधे जनता के किचन तक भेजने से पहले गहन सुरक्षा परीक्षण बहुत जरूरी हैं। सरकार को इसके तकनीकी पहलुओं और सुरक्षित सप्लाई चेन का व्यावहारिक खाका पहले बनाना होगा। इन जरूरी सुरक्षा सवालों के ठोस समाधान के बिना इस नीति को पूरी तरह प्रभावी नहीं मान सकते।
Author: Rajesh Kumar

