पानी में घुले जानलेवा एंटीबायोटिक जहर का वैज्ञानिकों ने खोजा अचूक इलाज, अब सूरज की रोशनी करेगी कमाल

Meerut News: चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पानी में मौजूद खतरनाक एंटीबायोटिक केमिकल्स को खत्म करने की अनोखी तकनीक खोजी है। यह एडवांस्ड तकनीक सूर्य की रोशनी की मदद से जल स्रोतों में घुले जहरीले तत्वों को पूरी तरह नष्ट कर देगी। इस खोज से स्वच्छ जल संकट दूर होगा।

सूरज की रोशनी से काम करेगी यह तकनीक

यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा और रिसर्चर दीपक कुमार ने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण कोरिया की डोंगुक यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर यह शोध पूरा किया। इनकी यह खास रिसर्च प्रतिष्ठित वैश्विक जर्नल ‘केमिकल कम्युनिकेशन’ में प्रमुखता से प्रकाशित हुई है।

वैज्ञानिकों ने एक बेहद स्मार्ट नैनोस्ट्रक्चर्ड फोटोकैटेलिस्ट्स मटेरियल विकसित किया है। यह अनूठा पदार्थ लाइट एनर्जी को सीधे पावरफुल केमिकल रिएक्शन में बदल देता है। जब इस विशेष मटेरियल पर सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो यह पानी में मौजूद भारी एंटीबायोटिक अवशेषों को छोटे-छोटे सुरक्षित हिस्सों में तुरंत तोड़ देता है।

वॉटर ट्रीटमेंट के लिए बनाई स्पेशल मेम्ब्रेन

इस अद्भुत शोध के लिए वैज्ञानिकों ने नोबल मेटल-टीएमओ-कार्बन हाइब्रिड फोटोकैटेलिस्ट्स नामक नई डिजाइन रणनीति अपनाई है। इस प्रक्रिया से प्रदूषित पानी को साफ करने की क्षमता काफी ज्यादा बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान कई मल्टी-कंपोनेंट हेटेरोस्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल किया, जिसके शानदार परिणाम सामने आए।

इसके साथ ही टीम ने कार्बन-डेकोरेटेड टीआईओ2 टेक्सटाइल मेम्ब्रेन्स भी तैयार की हैं। इन बेहतरीन मेम्ब्रेन्स को भविष्य में बड़े वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट और डोमेस्टिक सिस्टम्स में आसानी से लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि यह सिस्टम बार-बार इस्तेमाल के बाद भी अपनी कार्यक्षमता कभी नहीं खोता है।

प्रदूषित पानी साफ करने में मिलेंगे बड़े फायदे

इस नई पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से प्रदूषित औद्योगिक पानी को बहुत कम खर्च और न्यूनतम ऊर्जा में साफ किया जा सकेगा। इससे इंसानी शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरिया फैलने का बड़ा खतरा काफी कम हो जाएगा। ग्रामीण और विकासशील क्षेत्रों के लिए यह तकनीक भविष्य में वरदान साबित होने वाली है।

वैज्ञानिक अब इस बेहतरीन तकनीक को और ज्यादा अपग्रेड करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद ले रहे हैं। सीसीएसयू की यह एक्सपर्ट टीम अब तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पब्लिकेशंस में 20 से अधिक शोध पत्र सफलतापूर्वक प्रकाशित कर चुकी है। टीम फिलहाल ड्रेन वॉटर ट्रीटमेंट के प्रोटोटाइप पर काम कर रही है।

Author: Mohit

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