Himachal Pradesh News: केंद्र सरकार ने चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी योजना के तहत चिनाब नदी के पानी को ब्यास नदी में डायवर्ट किया जाएगा। केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले से गर्मियों के महीनों में उत्तरी भारत के मैदानी राज्यों में पानी की भीषण किल्लत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
माइनस 20 डिग्री तापमान में एनएचपीसी बनाएगी ऐतिहासिक टनल
राष्ट्रीय जलविद्युत निगम यानी एनएचपीसी इस पूरे प्रोजेक्ट को 2352.17 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करेगी। लाहौल-स्पीति के बर्फीले पहाड़ों के बीच बनने वाली यह टनल देश में एक नई इंजीनियरिंग क्रांति लाएगी। कोकसर में सर्दियों के दौरान तापमान माइनस 20 डिग्री तक गिर जाता है। ऐसे मुश्किल हालात में पहाड़ों को काटकर टनल बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत पाकिस्तान को मिलेगा कड़ा रणनीतिक संदेश
सिंधु जल समझौते के तहत चिनाब नदी के पानी पर पाकिस्तान हमेशा अपना दावा जताता रहता है। भारत अब अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर अपनी तकनीकी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन करने जा रहा है। भारत इस पानी को पाकिस्तान की तरफ बेकार बहने देने के बजाय टनल के रास्ते अपने ही देश के सूखाग्रस्त इलाकों की ओर मोड़ेगा।
गर्मियों में ग्लेशियर पिघलने से आने वाले सैलाब का होगा इस्तेमाल
लाहौल की चंद्रा नदी सर्दियों के मौसम में पूरी तरह बर्फ में तब्दील हो जाती है। गर्मियों में ग्लेशियर पिघलने से मई से सितंबर के बीच इस नदी में पानी का भारी उफान आता है। नई टनल परियोजना ठीक इसी जादुई समय का पूरा फायदा उठाएगी। मानसून के दौरान ब्यास नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ को भी इसके जरिए रोका जा सकेगा।
राजस्थान के रेगिस्तान और हरियाणा के खेतों को मिलेगी नई जिंदगी
यह आधुनिक वाटर डायवर्जन सिस्टम भाखड़ा, पोंग और डैहर बांधों में जलस्तर को पूरी तरह संतुलित रखेगा। इससे देश में बिजली का उत्पादन काफी बढ़ जाएगा। ब्यास नदी से होता हुआ यह अतिरिक्त पानी सीधे पंजाब के हरिके बैराज पहुंचेगा। वहां से इंदिरा गांधी नहर के जरिए राजस्थान के थार रेगिस्तान और हरियाणा के खेतों की प्यास बुझाई जाएगी।
Author: Sunita Gupta


