Meerut News: उत्तर भारत में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी अब लोगों को मानसिक रूप से बीमार बना रही है। अस्पतालों की मेंटल हेल्थ ओपीडी में अचानक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, घबराहट और अनिद्रा के मरीजों की संख्या में 40 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है। डॉक्टर इसे सीधे तौर पर खतरनाक ‘हीट स्ट्रेस बिहेवियर चेंज’ मान रहे हैं।
शहर के शास्त्री नगर, कंकरखेड़ा और गंगानगर इलाकों से चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। यहां सामान्य लोग भी अब ट्रैफिक, बिजली कटौती या मामूली शोर होने पर अचानक हिंसक और आक्रामक हो रहे हैं। अत्यधिक गर्मी और मानसिक थकान के कारण परिवारों में आपसी विवाद और तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
दिमाग के सोचने की क्षमता पर सीधा असर
अत्यधिक तापमान हमारे दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और लिंबिक सिस्टम को पूरी तरह प्रभावित करता है। यह हिस्सा इंसान के धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता और भावनाओं को नियंत्रित करता है। शरीर में पानी की कमी होने से मस्तिष्क में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह काफी कम हो जाता है।
इसके कारण लोगों में अचानक सोचने-समझने की क्षमता घटने लगती है। युवाओं में ओवरथिंकिंग और वर्किंग प्रोफेशनल्स में मेंटल बर्नआउट के मामले 75 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। वहीं छोटे बच्चे अचानक बहुत जिद्दी और हाइपर एक्टिव हो रहे हैं, जबकि बुजुर्गों में मानसिक भ्रम की स्थिति दिख रही है।
हीट वेव से बचने के लिए जरूरी उपाय
डॉक्टरों के अनुसार इस जानलेवा मानसिक दबाव से बचने के लिए दिनभर में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स पीते रहें। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बिल्कुल बचें। रात को पूरी नींद लें क्योंकि नींद की कमी सीधे तौर पर एंग्जायटी और पैनिक अटैक को ट्रिगर करती है।
मोबाइल और लैपटॉप का स्क्रीन टाइम सीमित रखें। चाय, कॉफी और ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन तुरंत कम कर दें। यदि आपको लगातार बिना किसी वजह के बेचैनी या अत्यधिक गुस्सा महसूस हो, तो तुरंत किसी योग्य मनोचिकित्सक से सलाह लें। लापरवाही बरतने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।
Author: Asha Thakur

